DNTs SEED Yojana Kya Hai? | 5 Best Benefits of Scheme for Economic Empowerment Of DNTs, SEED

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जब से हमारा भारत आजाद हुआ, लगभग सभी तरह के लोगों के लिए सभी नागरिकों के लिए भारत के हर तबके के लोगों के लिए बहुत सी योजनाएं बीते समय में बनाई गयी है और अभी भी सैकड़ों योजनाएं चल रही है।

लेकिन इन सबके बीच हमने उन लोगों को छोड़ दिया या यूं कहें की लगभग यह भूल ही गए थे की हमारे देश में एक आबादी खानाबदोश के रूप में भी रहती है जिसके लिए किसी भी तरह का कोई भी ध्यान नहीं दिया गया।

ये वो लोग है जो कहीं न कहीं गावों में आज भी देखने को मिलते है ग्रामीण जीवन समाज की परंपराओं में भी इनका एक स्थान रहता है, खासकर शादियों के समय इनके ही द्वारा बनाये गए सामानों से विवाह के कार्यक्रम सम्पन्न होते है।

हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में इनका समाजिक योगदान अलग-अलग है लेकिन एक बात जो इनको बाकि के लोगों से अलग बनाती है और वह है घुमंतू (खानाबदोश/Nomad) जीवन।

आपने अक्सर या कभी न कभी अपनी किसी यात्रा के दौरान ट्रेनों (Trains) में गाने-बजाने वालों या फिर नृत्य (Dance) दिखाने वालों को देखा होगा। इसके अलावा, आपने तमाम चौराहों अथवा नुक्कड़ों पर सपेरों, बंजारों अथवा मदारियों को जरूर देखा होगा।

क्या आपने कभी सोचा कि यह लोग कौन हैं ….. इनका इतिहास (History) क्या है, यह अपनी जिंदगी में इसी तरह के काम क्यों कर रहे हैं और हमने अथवा Goverment ने इनके जीवन शैली के विकास के लिए अभी तक क्या किया?

Hello Friends, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर आज हम बात करने जा रहे है, Scheme for Economic Empowerment of DNTs के बारे में… यह योजना क्या है? इसके क्या फायदे है? इस योजना से किसको लाभ मिलेगा? यह योजना किस तरह से खानाबदोश जीवन जीने वाले लोगों को लाभ पहुँचा सकती है? जानेंगे इन सारी बातों के बारे में उम्मीद करता हूँ आपको यह पसंद आएगा।

DNTs SEED Yojana Kya Hai
DNTs SEED Yojana Kya Hai

DNTs SEED Yojana Kya Hai? –

कुछ दिनों पहले 16 फरवरी 2022 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार (Dr. Virendra Kumar) ने “DNTs की आर्थिक अधिकारिता के लिए योजना” (Scheme for Economic Empowerment of DNTs) की शुरुआत की, संक्षेप में इस योजना को “SEED” कहा जा रहा है, DNTs के कल्याण के लिए शुरू की गई इस योजना के मुख्य चार घटक हैं, जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे।

DNTs SEED Yojana की जरूरत क्यों पड़ी? –

दरअसल ब्रिटिश सरकार (British Government) के दौरान साल 1871 में एक कानून आया जिसे आपराधिक जनजाति अधिनियम, 1871 (Criminal Tribes Act, 1871) कहा गया।

पीढ़ियों से इनके द्वारा किये जा रहे कामों के कारण इस कानून के तहत लगभग 200 समुदायों को ‘वंशानुगत अपराधी’ मान लिया गया था, क्योंकि इनमें से कुछ लोग लूटपाट और छिनैती जैसी आपराधिक कामों आदि के माध्यम से पैसे कमाकर अपना जीवन यापन करते थे।

इस तरह ये समुदाय निगरानी, कारावास और घोर भेदभाव के शिकार होते चले गए। तत्कालीन नीति निर्धारकों का ऐसा मानना था कि अपराध एक आनुवांशिक लक्षण है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में अपने आप पहुंच जाता है।

खैर इन सबके… बाद में जब देश आजाद हुआ तो साल 1949 में एक अखिल भारतीय आपराधिक जनजाति जाँच समिति (All India Criminal Tribes Inquiry Committee) का गठन किया गया। इस समिति के सिफारिश के आधार पर (Based on the recommendation of the committee), अंग्रेजों के बनाए गए इस कानून को 1952 में हटा दिया गया।

जिसके बाद इन्हें गैर-अधिसूचित, खानाबदोश और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (De-notified, Nomadic and Semi Nomadic Communities) के रूप में जाना जाने लगा।

यह लोग कई तरह के पेशों में काम करते हैं जैसे कि भेड़ बकरियों इत्यादि जानवरों को चराने का काम करना, छोटे जीवों का शिकार, खाद्य-संग्रहण, नाचना-गाना, कलाबाजी दिखाना, सपेरे और मदारी आदि के रूप में काम करके अपनी आजीविका चलाना।

इस जनजाति का इस तरह घुमंतू जीवन इसलिए हो गया, क्योंकि उस समय तत्कालीन परिस्थितियों में अपराध करने के बाद पुलिस-प्रशासन आदि से बचने के लिए यह अपने ठिकाने को बदलते रहते थे।

कई बार यह आजीविका की तलाश में भी अपने आवास को बदलते रहते थे, जिस कारण कहीं पर पक्के या स्थाई आवास बनाना संभव नहीं होता था, उदाहरण के तौर पर जब किसी खास इलाके (Area) के घास को पशुओं द्वारा चरके खत्म कर लिया जाता था तो वहां के चरवाहे उस जगह को छोड़कर किसी और जगह पर चला जाते थे।

इनके कल्याण के लिए आजादी के बाद समय-समय पर सरकारों द्वारा कई कदम भी उठाए गए, लेकिन इनकी स्थिति में बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं आया।

इस तरह यह लोग सबसे उपेक्षित, हाशिए पर और आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समुदाय बन गए, वे पिछले कई पीढ़ियों से इसी तरह बदहाली का जीवन जीने को मजबूर हैं, दिनभर में केवल खाने की जरूरतों के लिए संसाधन जूटा पाते है।

आर्थिक गरीबी के कारण इन लोगों के पास अबतक कभी भी निजी भूमि या घर के मालिकाना हक तक पहुंच नहीं थी।

DNTs SEED yojana kya hai? इसका संक्षिप्त विवरण –

योजना का नाम DNTs की आर्थिक अधिकारिता के लिए योजना (Scheme for Economic Empowerment Of DNTs, SEED)
इसे किसने शुरू किया 16 फरवरी को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार (Dr. Virendra Kumar) ने DNTs की आर्थिक अधिकारिता के लिए योजना शुरू की
इस योजना के लाभार्थी समाज के सबसे निचले तबके के खानाबदोश जीवन जीने वाले लोग
योजना कब शुरू की गयी फरवरी 2022
योजना का उद्देश्य खानाबदोश जीवन जीने वाले लोगों का सर्वांगीण विकास करना और उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाना, उन्हें समाजिक रूप से पहचान दिलाना
यह योजना किस राज्य के लिए है केन्द्र सरकार द्वारा द्वारा शुरू की गयी यह योजना भारत के सभी राज्यों के लोगों के लिए है

यह वर्ग मूलभूत सुविधाओं से कैसे वंचित है? –

De-Notified Tribes सबसे उपेक्षित, हाशिए पर और आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समुदाय हैं, वे पीढ़ियों से बदहाली का जीवन जी रहे हैं।

आर्थिक गरीबी के कारण ईन लोगों के पास अबतक कभी भी निजी भूमि या घर के मालिकाना हक तक पहुंच नहीं थी।

इन जनजातियों ने आवासीय उपयोग और अपनी आजीविका के लिए जंगलों और हरे घास के मैदानों वाली भूमि का उपयोग किया, आमतौर पर ये जंगलों में या उसके आसपास के घास के मैदानों के पास रहा करते है, ताकि पशुओं को आसानी से चारा उपलब्ध हो सके।

DNTs SEED Yojana Kya Hai
DNTs SEED Yojana Kya Hai

इस जनजाति के लोगों के विकास के लिए, राष्ट्रीय गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध घुमंतू जनजाति आयोग (National Commission for De-Notified, Nomadic and Semi Nomadic Tribe)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Empowerment) ने “गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध घुमंतू जनजातियों (DNTs) के लिए राष्ट्रीय आयोग” का गठन करने का निर्णय लिया, ताकि सही रूप से इनके बारे में आवश्यक जानकारी जुटाने के साथ इनके विकास के लिए योजनाएं बनाई जा सके।

इसका गठन भीकू रामजी इदाते की अध्यक्षता में तीन साल की अवधि के लिए किया गया था। इस आयोग ने दिसंबर, 2017 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

DNTs के लिए शुरू की गयी इस योजना के क्या फायदे है? –

  • इन समुदायों के उम्मीदवारों के लिए अच्छी गुणवत्ता की कोचिंग प्रदान करना, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे कि सिविल सर्विसेज, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और एमबीए आदि में प्रवेश ले सकें।
  • Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana के माध्यम से इन समुदायों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से इनके आवास की व्यवस्था करना।
  • और DNT/NT/SNT समुदाय संस्थानों के छोटे समूहों को बनाने और मजबूत करने के लिए सामुदायिक स्तर पर आजीविका पहल की सुविधा प्रदान करना, यहाँ पर DNT का मतलब होता है डिनोटिफाइड ट्राइब्स, NT मतलब होता है नोटिफाइड ट्राइब्स और SNT का मतलब होता है सेमी नोटिफाइड ट्राइब्स।

DNTs Yojana का बजट कितना रखा गया है? –

SEED योजना के तहत, 2021-22 से 2025-26 तक, 5 वर्षों की अवधि में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, Yojana को लागू करने का काम यानी इसकी नोडल एजेंसी सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (Department of Social Justice and Empowerment) को बनाया गया है।

इस विभाग ने योजना को लागू करने के लिए एक पोर्टल भी बनाया है। इस पोर्टल के माध्यम से लाभार्थी अपना रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे और साथ ही अपने आवेदन की वास्तविक स्थिति को भी ट्रैक कर सकेंगे।

इसके माध्यम से लाभार्थियों को सीधे उनके खाते में भुगतान किया जा सकेगा। इसके अलावा, यह पोर्टल इन समुदायों से जुड़े डाटा स्टोरेज के रूप में भी काम करेगा। गौरतलब है कि साल 2015 में इस समुदाय के कल्याण के लिए एक राष्ट्रीय गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध घुमंतू जनजाति आयोग भी गठित किया गया था।

इस योजना क बारे में विडिओ कंटेन्ट देखने के लिए यह विडिओ देख सकते है –

Summery Of The Article –

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DNTs SEED Yojana Kya Hai?

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार (Dr. Virendra Kumar) ने DNTs की आर्थिक अधिकारिता के लिए योजना की शुरुआत की, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गैर-अधिसूचित, घुमंतू और अर्ध घुमंतू जनजाति के लोगों के लिए विकास के नए रास्ते खोलना।

DNTs SEED योजना के क्या फायदे है?

इन समुदायों के उम्मीदवारों के लिए अच्छी गुणवत्ता की कोचिंग, स्वास्थ्य बीमा, आवास इत्यादि सुविधाएं दी जाएंगी।

DNTs SEED योजना की शुरुआत कब हुई?

16 फरवरी 2022 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने DNTs की आर्थिक अधिकारिता के लिए योजना की शुरुआत की.

DNTs Yojana का बजट कितना रखा गया है? –

SEED योजना के तहत, 2021-22 से 2025-26 तक, 5 वर्षों की अवधि में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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