Aaj Kaun Sa De Hai? आज कौन सा डे है? दिवस, त्यौहार, जयंती, व्रत.. 5 Best Tips to Manage Your Day

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कई बार हमें आज कौन सा दिन है और उस दिन के बारे में कभी-कभी महत्वपूर्ण चीजें भी मालूम नहीं रहती है जिन्हें जानना जरूरी होता है, पूरे साल में कुछ ऐसे खास दिन होते है जो आमतौर पर हम सभी को याद रहते है।

अधिकतर छोटे ईवेंट या त्यौहार वाले दिन को लोग याद नहीं रख पाते है, लेकिन इनमें कुछ ऐसे भी दिन है जो भारत के हर व्यक्ति या समुदाय के लिए अलग-अलग मायने रखते है, इसलिए हमें उनके बारे में भी जानना चाहिए।

Hello Friends, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर आज हम बात करने जा रहे है, आज के दिन के बारे में… आज कौन सा डे है? (Aaj Kaun Sa De Hai) आज के दिन से जुड़ा इतिहास क्या है? हम अपने दिन का पता लगाने के लिए किस कैलेंडर का प्रयोग करते है? दिन और समय को कैसे मापते है? साथ ही इस साल 2022 के हर महीनों के calander के बारे में भी जानकारी दी गयी है, उम्मीद करता हूँ आपको यह पसंद आएगा।

Google Aaj Kaun Sa De Hai
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Aaj Kaun Sa De Hai? आज कौन सा डे है?

आज कौन सा दिन है (Aaj Kaun Sa De Hai) इसके बारे में जानकारी नीचे इस लाइव चल रही घड़ी के बारे में देख सकते है…

यह घड़ी Indian Standard Time (IST) के अनुसार बिल्कुल लाइव समय में वर्तमान दिन (वार), दिनांक, महीना और वर्ष को बताता है, Indian Standard Time या भारतीय मानक समय क्या होता है इसके बारे में हमने नीचे बात की है।

आने वाले दिनों के इतिहास, दिवस, त्यौहार और महत्वपूर्ण ईवेंट –

इस सप्ताह आने वाले दिनों के खास ईवेंट और इतिहास, इस लिस्ट में इसके अलावा भी बहुत से इवेंट्स है, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण ईवेंट को शामिल किया गया है, अपने दिन के हिसाब से आज कौन सा डे है? (Aaj Kaun Sa De Hai) इसके बारे में जानकारी ले सकते है।

5 मार्च से जुड़े खास तथ्य –

  • महाराजा जय सिंह ने इसी दिन 1699 में अंबर का सिंहासन पर बैठकर राज्यभार संभाला।
  • इस दिन 1793 में आस्ट्रिया के सैनिकों ने फ्रांस को हरा कर उसके साम्राज्य पर फिर से कब्जा किया।
  • सन 1851 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) की स्थापना।
  • 1904 में निकोला टेस्ला ने बॉल तड़ित (ball lightning) की व्याख्या की।
  • सोवियत संघ ने पेट्रोग्राड को हटाकर मॉस्को को रूस की राजधानी सन 1918 में बनाया।
  • 1931 में महात्मा गांधी (Mahtma Gandhi) ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को खत्म किया।
  • इस दिन 1949 में भारत में झारखंड पार्टी की स्थापना हुई।
  • 1968 में आज ही के दिन मार्टिन लूथर किंग (Martin Luther King) की हत्या हुई।
  • 1982 में रूस के द्वारा भेजा गया नामक उपग्रह “वेनेरा 14” बुध की कक्षा में पहुँचा। (Aaj Kaun Sa De Hai)
  • 2008 में भारत ने समुद्र से ज़मीन पर हमला करने वाले ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल (‘Brahmos’ missile) का सफल परीक्षण किया।
  • इसी दिन 2009 में इफ्को (‘इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड) एक करोड़ टन उर्वरक की वार्षिक बिक्री करने वाली विश्व की पहली कम्पनी बनी।
  • स्वतंत्रता सेनानी सुशीला दीदी का 1905 में पंजाब में जन्म, इन्होंने भारत को आजाद कराने में भगत सिंह की क्रांतिकारी गतिविधियों में सहयोग किया था।
  • 1959 में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के समर्पित कार्यकर्ता एवं ‘भारतीय जनता पार्टी’ के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान का जन्म हुआ।

6 मार्च से जुड़े खास तथ्य (Aaj Kaun Sa De Hai) –

  • 1775 में रघुनाथ राव ने पहले एंग्लो-मराठा युद्ध को समाप्त करने के लिए अंग्रेजों के साथ सूरत की संधि पर हस्ताक्षर किये।
  • 1902 में ‘मैड्रिड क्लब’ की स्थापना हुई जो कि स्पेन का एक मशहूर फुटबॉल क्लब है।
  • आज के दिन 1915 में रविन्द्रनाथ टैगोर और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी शांतिनिकेतन में पहली बार मिले।
  • आज के ही दिन सन 1944 में अमेरिका ने मित्र देशों के साथ मिलकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्लिन पर भारी बमबारी की।
  • 1947 में भारत से ब्रिटिश सैनिकों को हटाये जाने का विरोध में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल (Winston Churchill) ने की घोषणा की।
  • 1947 में बॉम्बे से इकनोमिक टाइम्स (economic times) का सम्पादन शुरू हुआ था।
  • 1961 में टाइम्स आफ इंडिया समूह द्वारा भारत का पहला वित्तीय डेली समाचार पत्र ‘द इकोनोमिक टाइम्स’ बॉम्बे में लॉन्च हुआ।
  • 1508 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में, मुग़ल साम्राज्य के शासक बाबर के बेटे हुमायूँ का जन्म हुआ।
  • आज ही के दिन 1787 में जर्मन भौतिकशास्त्री जोसेफ़ फॉन फ्रॉन्होफ़र का जन्‍म हुआ।

7 मार्च से जुड़े तथ्य –

  • 7 मार्च को 1854 में चार्ल्‍स मिलर ने सिलाई मशीन के लिए पेटेंट हासिल किया था।
  • 1875 में आज ही के दिन अलेक्‍जेंडर ग्राहम बेल ने टेलीग्राफ का आविष्‍कार किया था।
  • 1876 में एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल को अपने टेलीफोन (Telephone) आविष्कार का पेटेंट मिला।
  • फिनलैंड में सन 1906 से महिलाओं को वोट डालने का अधिकार (women’s right to vote) मिला।
  • सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन का जन्म 1911 में उत्तर प्रदेश में हुआ, ये एक प्रसिद्ध हिन्दी लेखक है।
  • 1945 में अमेरिकी फौज ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की राइन नदी को पार किया।
  • सन 1959 में अमेरिकी पायलट मेल्विन सी गार्लोव (Melvin C Garlov) जेट विमानों से एक लाख मील की दूरी तय करने वाले पहले पायलट बने।
  • सन 1985 में एड्स का पहला एंटीबॉडी परीक्षण एलिसा-टाइप टेस्ट (ELISA-Type Test) शुरु किया गया।
  • मंगल (Mars) ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों ने झील की 2008 में खोज की।
  • नासा ने केप कनावेरल से केप्लर नाम की एक दूरबीन को 2009 में अंतरिक्ष में छोड़ा था, जो कि ब्रम्हांड में पृथ्वी जैसे ग्रह और उनपर जीवन को तलाशने के लिए बनाया गया था।
  • आज के दिन 1955 में भारतीय अभिनेता अनुपम खेर का जन्म।

8 मार्च से जुड़े तथ्य –

  • आज के दिन पहली बार अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाया गया था।
  • वसुंधरा राजे सिंधिया का जन्म आज ही के दिन 1953, जो कि बाद में वे राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
  • 8 मार्च 1930 को महात्मा गांधी के द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया गया।
  • 1948- एअर इंडिया इंटरनेशनल की स्थापना।

9 मार्च से जुड़े तथ्य –

  • 9 मार्च 1822 में पहली बार नकली दांतो का पेटेंट चार्ल्स एग ग्राहम ने कराया।
  • 1916 में पुर्तगाल (Portugal) के खिलाफ जर्मनी ने युद्ध की घोषणा की।
  • 1959 में बार्बी डॉल जो कि दुनिया में सबसे ज्‍यादा पसंद की जाने वाली डॉल है, न्‍यूयार्क के अमेरिकन टॉय फेयर (American Toy Fair) में अपनी जिंदगी शुरू की थी।
  • आज के दिन यूरी गैगरिन का 1934 में जन्‍म हुआ जो कि रूसी सोवियत पायलट और कॉस्‍मोनॉट थे।
  • 1951 में उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का जन्म हुआ, जो कि मशहूर तबला वादक है।

10 मार्च से जुड़े तथ्य (Google Aaj Kaun Sa De Hai) –

  • 1624 में स्पेन के खिलाफ इंग्लैंड ने युद्ध की घोषणा की।
  • आज के दिन ही 1801 में ग्रेट ब्रिटेन में पहली बार आम जनगणना (general census) की गई।
  • 1847 में हवाई में पहले सिक्के की ढलाई (coin minting) की गई।
  • 1862 में जांजीबार की आजादी को ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस ने मान्यता दी।
  • 1876 में अमरीकी आविष्कारक एलेग्ज़न्डर ग्राहम बेल ने टेलीफ़ोन (Telephone) का आविष्कार किया और आज ही के दिन सहयोगी वाटसन ग्राहम बेल और के बीच पहली सफल टेलीफ़ोन वार्ता (telephone conversation) हुई।
  • 1922 में चीन के द्वारा परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर, किया गया।
  • 1945 में अमेरिकी सेना ने जापान (Japan) में बमबारी की, जिससे लाखों लोग घायल हुए।
  • 2010 में महिला आरक्षण विधेयक भारतीय संसद की ऊपरी सदन राज्यसभा में पारित हो गया।
  • 1956 में भारतीय लेखक शशि थरूर का जन्म।
  • 1985 में पार्थिव पटेल का जन्म हुआ जो कि एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी है।

11 मार्च से जुड़े फैक्ट –

  • 1399 में तैमूर लंग ने दिल्ली सहित उत्तर भारत में मारकाट (लाखों लोगों को मारने) मचाने के बाद सिन्धु नदी पार की।
  • सन 1918 में मास्को रूस की राजधानी (Capital) बनी।
  • 1999 में इंफोसिस कंपनी पहली भारतीय कंपनी, जो कि नशदाक (NASDAQ) अंतरराष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (international stock exchange) की सूची में आई।
  • 2007 में सुनिता ने कोलकाता से वाघा तक के 2,012 किमी के सफर को रिवर्स गियर (reverse gear) में गाड़ी चलाकर पूरा किया।
  • 2008 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के यान एंडेवर (Endeavor) ने अंतरिक्ष स्टेशन की ओर उड़ान भरी।

12 मार्च से जुड़े फैक्ट (Google Aaj Kaun Sa De Hai) –

  • अमेरिका में 1755 में भाप के पहले इंजन का इस्तेेमाल (first steam engine) खदान से पानी निकालने के लिए किया गया।
  • ब्रिटेन में मुख्य लाइन पर 1904 में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन (first electric train) चली।
  • ब्रिटिश सैनिकों ने 1942 में अंडमान द्वीप (Andaman Islands) खाली किया।
  • भारत सरकार ने 1954 में साहित्य अकादमी (Sahitya Akademi) का उद्घाटन किया।
  • जमैका में 2007 में 9वें विश्वकप क्रिकेट (9th cricket world cup) का उद्घाटन हुआ।

2022 के महत्वपूर्ण दिवस –

इस साल के आने वाले महत्वपूर्ण दिवस, त्यौहार और ईवेंट इत्यादि के बारे में पूरी जानकारी आज कौन सा डे है? (Google Aaj Kaun Sa De Hai) इसके बारे में जानकारी ले सकते है –

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जनवरी (January)

Date Event/Festivals/Holidays
1 जनवरी (शनिवार)ईसाई नव वर्ष आरंभ, मास शिवरात्रि
2 जनवरी (रविवार)प्रकृति दिन, अमावस्या
3 जनवरी (सोमवार)सोमवार व्रत, चंद्र दर्शन
4 जनवरी (मंगलवार)लुईस ब्रेल दिवस
6 जनवरी (वृहस्पतिवार)वरद चतुर्थी
8 जनवरी (शनिवार)षष्ठी
9 जनवरी (रविवार)गुरु गोविंद सिंह जयंती
10 जनवरी (सोमवार)विश्व हास्य दिवस, दुर्गाअष्टमी व्रत
12 जनवरी (बुधवार)राष्ट्रीय युवा दिवस
13 जनवरी (वृहस्पतिवार)वैकुंठ एकादशी, पौष पुत्रदा एकादशी, लोहड़ी (लोहरी)
14 जनवरी (शुक्रवार)गंगा सागर स्नान, पोंगल, कूर्म द्वादशी व्रत, रोहिणी व्रत, मकर संक्रांति
15 जनवरी (शनिवार)थल सेना दिवस, प्रदोष व्रत
17 जनवरी (सोमवार)पूर्णिमा, पौष पूर्णिमा, सत्य व्रत, माघ स्नान प्रारंभ, पूर्णिमा व्रत
19 जनवरी (बुधवार)कुष्ठ निवारण दिवस
21 जनवरी (शुक्रवार)सकट चौथ, संकष्टई गणेश चतुर्थी
24 जनवरी (सोमवार)स्वामी विवेकानंद जयंती
25 जनवरी (मंगलवार)भारत पर्यटन दिवस, कलाष्टमी
26 जनवरी (बुधवार)गणतंत्र दिवस
28 जनवरी (शुक्रवार)षटतिला एकादशी
30 जनवरी (रविवार)सर्वोदय दिवस, शहीद दिवस, गांधी पुंडयतिथि, प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि

फरवरी (February)

Date Event/Festivals/Holidays
1 फरवरी (मंगलवार)अमावस्या, मौनी अमावस्या, भौमवती अमावस्या
2 फरवरी (बुधवार)माघ गुप्त नवरात्रि, शिशिर ऋतु, चंद्र दर्शन
4 फरवरी (शुक्रवार)विश्व कैंसर दिवस, वरद चतुर्थी, गणेश जयंती
5 फरवरी (शनिवार)बसंत पंचमी
6 फरवरी (रविवार)षष्ठी
7 फरवरी (सोमवार)सोमवार व्रत, रथ सप्तमी
8 फरवरी (मंगलवार)भीमाष्टमी, दुर्गाष्टमी व्रत
9 फरवरी (बुधवार)महानंदा नवमी
10 फरवरी (वृहस्पतिवार)रोहिणी व्रत
12 फरवरी (शनिवार)गुलाब दिवस, जय एकादशी
13 फरवरी (रविवार)कुम्भ संक्रांति
14 फरवरी (सोमवार)वेलेंटाइन डे, प्रदोष व्रत
15 फरवरी (मंगलवार)हजरत अली जन्मदिन
16 फरवरी (बुधवार)माघ पूर्णिमा, पूर्णिमा व्रत, रविदास जयंती, सत्य व्रत, माघ स्नान समाप्त
19 फरवरी (शनिवार)शिवजी जयंती
20 फरवरी (रविवार)संकटी गणेश चतुर्थी
21 फरवरी (सोमवार)अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
23 फरवरी (बुधवार)कलाष्टमी, बुधाष्टमी व्रत
24 फरवरी (वृहस्पतिवार)केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस
25 फरवरी (शुक्रवार)श्री रामदास नवमी
26 फरवरी (शनिवार)स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती
28 फरवरी (सोमवार)राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (national science day), प्रदोष व्रत, सोम प्रदोष व्रत

मार्च (March)

Date Event/Festivals/Holidays
1 मार्च (मंगलवार)महा शिवरात्रि
2 मार्च (बुधवार)अमावस्या
3 मार्च (वृहस्पतिवार)चंद्र दर्शन
4 मार्च (शुक्रवार)फुलेरा दूज, रामकृष्ण जयंती, राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस
6 मार्च (रविवार)वरद चतुर्थी
7 मार्च (सोमवार)सोमवार व्रत
8 मार्च (मंगलवार)षष्ठी, अंतराष्ट्रीय महिला दिवस
10 मार्च (वृहस्पतिवार)रोहिणी व्रत, होलाष्टक, दुर्गाष्टमी व्रत
12 मार्च (शनिवार)केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की स्थापना दिवस
14 मार्च (सोमवार)आमलकी एकादशी, गोविंद द्वादशी
15 मार्च (मंगलवार)भौम प्रदोष व्रत, प्रदोष व्रत, मीन संक्रांति, विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस
17 मार्च (वृहस्पतिवार)होलिका दहन, पूर्णिमा व्रत, होलाष्टक समाप्त, सत्य व्रत
18 मार्च (शुक्रवार)पूर्णिमा, होली, सत्य व्रत, चैतन्य महाप्रभु जयंती, आयुध निर्माण दिवस
19 मार्च (शनिवार)गणगौर व्रत प्रारंभ
21 मार्च (सोमवार)शिवजी जयंती, संकटी गणेश चतुर्थी, विश्व वानिकी दिवस
22 मार्च (मंगलवार)हिन्दू नव वर्ष, रंग पंचमी, विश्व जल दिवस
23 मार्च (बुधवार)भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु शहीद दिवस, विश्व मौसम विज्ञान दिवस, राम मनोहर लोहिया जयंती
24 मार्च (वृहस्पतिवार)शीतला सप्तमी, विश्व टीबी दिवस, ग्रामीण डाक जीवन बीमा दिवस
25 मार्च (शुक्रवार)कलाष्टमी, शीतला अष्टमी, गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस
26 मार्च (शनिवार)बांग्लादेश का राष्ट्रीय दिवस
27 मार्च (रविवार)विश्व थिएटर दिवस
28 मार्च (सोमवार)पापमोचनी एकादशी
29 मार्च (मंगलवार)भौम प्रदोष व्रत, प्रदोष व्रत
30 मार्च (बुधवार)मधु कृष्ण त्रयोदशी, रंग तेरस, मास शिवरात्रि

अप्रैल (April)

Date Event/Festivals/Holidays
1 अप्रैल (शुक्रवार)अप्रैल फूल दिवस, अमावस्या, वित्तीय वर्ष प्रारंभ
2 अप्रैल (शनिवार)चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, चंद्र दर्शन, बसंत ऋतु, चेटीचंड
3 अप्रैल (रविवार)झूलेलाल जयंती, रमजान उपवास शुरू
4 अप्रैल (सोमवार)मत्स्य जयंती, सोमवार व्रत, गौरी पूजा (गणगौर पूजा)
5 अप्रैल (मंगलवार)बाबू जगजीवन राम जयंती, वरद चतुर्थी
6 अप्रैल (बुधवार)रोहिणी व्रत
7 अप्रैल (वृहस्पतिवार)यमुना छठ, विश्व स्वास्थ्य दिवस, षष्ठी, विश्व स्वास्थ्य दिवस
9 अप्रैल (शनिवार)अशोक अष्टमी, दुर्गाअष्टमी व्रत
10 अप्रैल (रविवार)स्वामी नारायण जयंती, राम नवमी, खजूर रविवार (पाम संडे), श्री महातारा जयंती
12 अप्रैल (मंगलवार)वैष्णव कामदा एकादशी, कामदा एकादशी
14 अप्रैल (वृहस्पतिवार)बंगाली नववर्ष, पुण्य वृहस्पतिवार, प्रदोष व्रत, अंबडेकर जयंती, बैसाखी, महावीर जयंती, मेष संक्रांति, अंबेडकर जयंती, विश्व वानिकी दिवस ((Google Aaj Kaun Sa De Hai))
15 अप्रैल (शुक्रवार)गुड फ्राइडे
16 अप्रैल (शनिवार)चैत्र पूर्णिमा, सत्य व्रत, पूर्णिमा व्रत, पूर्णिमा, हनुमान जयंती, सत्य व्रत
17 अप्रैल (रविवार)ईस्टर
18 अप्रैल (सोमवार)विश्व विरासत दिवस
19 अप्रैल(मंगलवार)संकटी गणेश चतुर्थी, अंगारकी चतुर्थी
22 अप्रैल (शुक्रवार)पृथ्वी दिवस
23 अप्रैल (शनिवार)कालाष्टमी, विश्व पुस्तक दिवस
26 अप्रैल (मंगलवार)वल्लभाचार्य जयंती, वरुथिनी एकादशी
28 अप्रैल (वृहस्पतिवार)प्रदोष व्रत
29 अप्रैल (शुक्रवार)मास शिवरात्रि, जमात-उल-विदा
30 अप्रैल (शनिवार)अमावस्या ((Google Aaj Kaun Sa De Hai))

मई (May)

Date Event/Festivals/Holidays
1 मई (रविवार)मई दिवस, महाराष्ट्र दिवस, विश्व श्रमिक दिवस
2 मई (सोमवार)चंद्र दर्शन, सोमवार व्रत
3 मई (मंगलवार)रमजान, मातंगी जयंती, परशुराम जयंती, रोहिणी व्रत, अक्षय तृतीय, विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस
4 मई (बुधवार)वरद चतुर्थी
5 मई (शुक्रवार)सूरदास जयंती
7 मई (शनिवार)षष्ठी, रवींद्र नाथ टैगोर जयंती
8 मई (रविवार)विश्व प्रवासी पक्षी दिवस, विश्व रेडक्रॉस दिवस, विश्व थैलिसिमिया दिवस
9 मई (सोमवार)बगलामुखी जयंती, दुर्गाष्टमी व्रत
10 मई (मंगलवार)सीता नवमी
11 मई (बुधवार)राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस
12 मई (वृहस्पतिवार)मोहिनी एकादशी, विश्व नर्स दिवस
13 मई (शुक्रवार)परशुराम द्वादशी, प्रदोष व्रत
14 मई (शनिवार)नरसिंह जयंती
15 मई (रविवार)पूर्णिमा व्रत, वृषभ संक्रांति, सत्य व्रत, कूर्म जयंती, विश्व परिवार दिवस
16 मई (सोमवार)पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा (बुद्ध जयंती)
17 मई (मंगलवार)नारद जयंती, विश्व दूरसंचार दिवस
19 मई (बुधवार)संकष्टि गणेश चतुर्थी
21 मई (शनिवार)आतंकवाद विरोधी दिवस
22 मई (रविवार)कलाष्टमी, जैविक विविधता दिवस
26 मई (वृहस्पतिवार)अपर एकादशी, भद्रकाली जयंती
27 मई (शुक्रवार)प्रदोष व्रत
28 मई (शनिवार)मास शिवरात्रि ((Google Aaj Kaun Sa De Hai))
29 मई (रविवार)माउंट एवरेस्ट दिवस
30 मई (सोमवार)वट सावित्री व्रत, अमावस्या, सोमवार व्रत, शनि जयंती
31 मई (मंगलवार)रोहिणी व्रत, ग्रीष्म ऋतु, चंद्र दर्शन, विश्व तंबाकू निरोधी दिवस

जून (June)

DateEvent/Festivals/Holidays
2 जून (गुरुवार)महाराणा प्रताप जयंती
3 जून (शुक्रवार)वरद चतुर्थी
5 जून (रविवार)पष्टि, विश्व पर्यावरण दिवस
6 जून (सोमवार)अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति स्थापना दिवस, शीतल षष्ठी
08 जून (बुधवार)धूमावती जयंती, वृषभ व्रत दुर्गाष्टमी व्रत
09 जून (गुरुवार)महेश नवमी
10 जून (शुक्रवार)निर्जला एकादशी, गंगा दशहरा
12 जून (रविवार)प्रदोष व्रत
14 जून (मंगलवार)विश्व रक्तदान दिवस, पष्टि कबीर जयंती पूर्णिमा, देव स्नान पूर्णिमा, सत्य व्रत, वैट सावित्री पूर्णिमा, सत्य व्रत पूर्णिमा व्रत
15 जून (बुधवार)मिथुन संक्राति
17 जून (शुक्रवार)संकष्टी गणेश चतुर्थी
19 जून (रविवार)पितृ दिवस
20 जून (सोमवार)विश्व शरणार्थी दिवस
21 जून (मंगलवार)कालाष्टमी
24 जून (शुक्रवार)योगिनी एकादशी
26 जून (रविवार)प्रदोष व्रत
27 जून (सोमवार)रोहिणी व्रत, मास शिवरात्रि
29 जून (बुधवार)राष्ट्रिय सांख्यिकी दिवस, पी०सी० महालनोबिस का जन्म दिवस, अमावस्या
30 जून (गुरुवार)चन्द्र दर्शन, गुप्त नवरात्र प्रारम्भ ((Google Aaj Kaun Sa De Hai))
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विश्व के कुछ महत्वपूर्ण कैलेंडर –

सौरमंडल में हमारी धरती सूर्य का चक्कर लगा रही है और चंद्रमा हमारी चरती का चक्कर लगा रहा है, लेकिन क्या आप जानते है कि धरती पर होने वाले दिन और रात धरती के घूमने की वजह से होते है और चंद्रमा धरती और सूर्य के घूमने के लिए आकर्षण बल और कक्षीय गति से आवश्यक स्थिरता प्रदान करता है, धरती पर आने वाले ज्वार-भाटा (समुद्र के जलस्तर का घटना और बढ़ना) चंद्रमा के कारण ही आते है।

इन सबके अलावा धरती पर जो मौसम में बदलाव होते है वह धरती के द्वारा किये जाने वाले सूर्य की कक्षीय गति के कारण होते है, हमारी धरती प्रवल्यकार रूप में सूर्य की परिक्रमा कर रही है, जब धरती सूर्य के निकट जाती है तो तापमान बढ़ता है और जब धरती सूर्य से दूर जाती है तो तापमान घटता है।

किसी भी कैलेंडर का निर्माण सूर्य या चंद्रमा की गणना पर आधारित होता है, सूर्य चक्र पर आधारित कैलेंडर में 365 दिन (Aaj Kaun Sa De Hai) और चंद्र चक्र पर आधारित कैलेंडर में 354 दिन होते है, अलग-अलग कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा के गणनाओं को अपने हिसाब से प्रयोग करते है।

नीचे हम कुछ प्रमुख कैलेंडर के बारे में बात करने जा रहे है जिनके बारे में आपको जानना चाहिए, लेकिन इससे पहले यह ध्यान रखें कि।

भारत मे अलग-अलग धर्मों के अलग-अलग कैलेंडर है, जो उसी धर्म में प्रयोग किया जाते है जिसके लिए वे बनाये गए है, हालांकि भारत में भी ग्रेगोरियन कैलेंडर का प्रयोग होता है, लेकिन धार्मिक कार्यों और प्रयोजनों के लिए शुभ मुहूर्त देखने के लिए आज भी अलग-अलग धर्म अपने कैलेंडर का प्रयोग करते है।

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ग्रेगेरियन कैलेंडर –

अभी के समय में हम जिस कैलेंडर का इस्तेमाल कर रहे है उसे ग्रेगेरियन कैलेंडर कहा जाता है, इस कैलेंडर की शुरुआत सन सन् 1582 में हुई थी, ग्रेगेरियन कैलेंडर के पहले रूस का जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे।

ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार जनवरी साल का पहला महीना है और दिसंबर साल का सबसे अंतिम महीना है, साल के खत्म होते समय 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाने के कुछ दिन बाद ग्रेगेरियन कैलेंडर में एक नया साल शुरू हो जाता है।

जिसे हम आज के समय में नए साल (New Year) के रूप में मनाते है, ग्रेगेरियन कैलेंडर में क्रिसमस, 15 अगस्त, 26 जनवरी जैसे बहुत से दिन निश्चित हो गए है जो हर साल उसी खास दिन पर पड़ते है।

ग्रेगेरियन कैलेंडर में साल के हर महीने बराबर नहीं है, आप देखते होंगे कि कुछ महीने 30 दिन, कुछ महीने 31 दिन और फरवरी 28 दिन (लीप वर्ष में 29 दिन) के होते है, लीप वर्ष हर चार वर्षों में एक बार आता है जिसमें फरवरी माह में 28 दिन के स्थान पर 29 दिन होते है।

जिस कैलेंडर को Aaj Kaun Sa De Hai जानने के लिए प्रयोग करते है यह काफी पुराना कैलेंडर माना जाता है, लेकिन और भी ऐसे कैलेंडर है जो इससे पूर्व में प्रचलित थे।

महीने दिनों की संख्या
जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर, दिसंबरदिनों की संख्या 31
अप्रैल, जून, सितंबर, नवंबरदिनों की संख्या 30
फरवरीदिनों की संख्या 28 और लीप वर्ष में 29 दिन

ग्रेगेरियन कैलेंडर में समय की गणना को लेकर कुछ कमियाँ है, जिसके कारण हर चार सालों में इसमे समय का हर-फेर हो जाता है, जिसको एडजस्ट करने के लिए चौथे साल लीप इयर बना दिया जाता है जिसमें फरवरी 29 दिन की होती है।

इसके कुछ इस तरह समझ सकते है, दरअसल हम आमतौर पर दिन-रात को मिलकर 24 घंटे का मानते है वास्तव में वह 23 घंटे 56 मिनट और 4 सेकंड का ही होता है।

इसके साथ एक वर्ष में 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 45.51 सेकंड होते है, यह वो समय है जिसमें पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और इसे सौर वर्ष कहा जाता है।

जबकि एक साधारण वर्ष जो हमारे कैलेंडर में होता है वह 365 दिन का होता है और इस तरह प्रत्येक सौर वर्ष, साधारण वर्ष से 5 घंटे, 48 मिनट और 45.51 सेकंड बड़ा होता है, इस बढ़े हुए समय को कैलेंडर पर तो नहीं लिख सकते।

यदि वर्ष की गणना 365 दिन के अनुसार की जाती रहे तो प्रत्येक वर्ष साधारण वर्ष (हमारे कैलेंडर में दिन की संख्या) सौर वर्ष से 5 घंटे, 48 मिनट और 45.51 सेकंड छोटा होता चला जायेगा।

इस अशुद्धि को दूर करने के लिए प्रत्येक चार वर्ष बाद फरवरी माह में 1 दिन जोड़ दिया जाता है, क्योंकि 5 घंटे 48 मिनट चार साल में एक दिन के बराबर हो जाते है।

जिसके कारण यह एक दिन बनाकर फरवरी में जोड़ दिया जाता है और फरवरी 29 दिन की हो जाती है और वह साल 366 दिन का हो जाता है, इस प्रकार लीप वर्ष में 366 दिन (52 सप्ताह और 2 दिन) होते है।

लीप इयर के बाद भी समय से जुड़ी जो विसंगतिया रह जाती है उसे शताब्दी वर्ष (100 सालों) पर एडजस्ट किया जाता है।

इससे पहले रूस का जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था, इसकी शुरुआत जूलियस सीजर ने की थी, इस कैलेंडर में एक साल में 10 महीने होते थे और क्रिसमस एक निश्चित दिन नहीं आता था, क्रिसमस को एक निश्चित दिन को तय करने के लिए 15 अक्‍टूबर 1582 को अमेरिका के एलॉयसिस लिलिअस ने ग्रिगोरियन कैलेंडर शुरू किया।

प्राचीन जूलियन कैलेंडर में 365 दिन 6 घंटे का वर्ष माना जाता था, परंतु ऐसा मानने से प्रत्येक वर्ष क्रांति-पातिक सौर वर्ष से (5 घंटा 48 मिनट 46 सेकंड की अपेक्षा 6 घंटे अर्थात्) 11 मिनट 14 सेकंड अधिक लेते हैं।

इस समस्या के बारे में हमने ऊपर भी बात की है, यह आधिक्य 400 वर्षों में 3 दिन से कुछ अधिक हो जाता है, इस भूल पर सर्वप्रथम रोम के पोप (13वें) ग्रेगरी ने सूक्ष्मतापूर्वक विचार किया और इसकी बहुत सी विसंगतियों को दूर किया इसलिए इसको ग्रेगोरियन पद्धति अथवा ग्रेगेरियन कैलेंडर कहा गया।

ग्रेगेरियन कैलेंडर में दिन की शुरुआत रात के 12 बजे से मानी जाती है, जिसको दूसरे शब्दों में समझें तो रात 12 के बाद इस कैलेंडर में तारीख बदलती है।

रोमन कैलेंडर –

रोमन कैलेंडर को उस समय के राजा नूमा पोम्पिलियस ने स्थापित किया था, इस कैलेंडर में भी ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह जनवरी की शुरूआत से ही नववर्ष मनाया जाता था, रोमन कैलेंडर चंद्रमा की कलाओं (गणना) पर आधारित था।

जिस तरह की गणना रोमन कैलेंडर में की गई थी, इससे चंद्रमा की वास्तविक कलायें मिल नहीं पाईं, जिसके कारण इसमें दिए गए मौसमी चक्र का मिलान वास्तविक मौसम से नहीं हो पाया।

क्योंकि यह कैलेंडर चंद्रमा की गणनाओं पर आधारित था तो इसलिए इसमें केवल 20 महीने थे, जिसमें दिनों की कुल संख्या 304 थी।

इसके बाद जूलियस सीजर (Julius Caesar) ने इसमें आवश्यक सुधारों पर बल दिया और इस कार्य में उसने खगोलविद सोसिजीन्स (Socigenes) की सहायता ली।

समय के साथ किये गए बदलावों के साथ आज (Aaj Kaun Sa De Hai) के समय में यह कैलेंडर ग्रेगेरीयन कैलेंडर के नाम से जाना जाता है।

विक्रम संवत –

विक्रम संवत् या विक्रमी संवत, भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित हिन्दू पंचांग है, भारत के कई राज्यों में यह प्रचलित पंचाग है और केवल इतना ही नहीं नेपाल के सरकारी संवत् के रुप मे विक्रम संवत् ही चला आ रहा है।

विक्रम संवत की गणना में चन्द्र मास एवं सौर नक्षत्र वर्ष (solar sidereal years) का उपयोग किया जाता है, आमतौर पर यह माना जाता है कि विक्रमी संवत् की शुरुआत 57 ई.पू. में हुआ था, जिसको कुछ इस तरह से ज्ञात किया जा सकता है – विक्रमी संवत् = ईस्वी सन् + 57।

गुजरात में इस संवत् का आरम्भ कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (Kartik Shukla Pratipada)से और उत्तरी भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है।

एक वर्ष में बारह महीने और सप्ताह में सात दिन रखने का चलन विक्रम संवत् से ही शुरू हुआ। इसमें महीने का हिसाब सूर्य व चन्द्रमा की गति पर की गयी गणनाओं के आधार पर रखा जाता है।

यह बारह राशियाँ बारह सौर मास हैं, पूर्णिमा के दिन, चन्द्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है, चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से 11 दिन 3 घटी 48 पल ( इसमें घटी और पल, समय मापने की इकाइ है) छोटा है, इसीलिए प्रत्येक 3 वर्ष में इसमें 1 महीना जोड़ (add) दिया जाता है।

विक्रम संवत में जिस दिन नव संवत् (नए साल)का आरम्भ होता है, उस दिन के वार के अनुसार वर्ष के राजा का निर्धारण होता है, आरम्भिक शिलालेखों में ये वर्ष ‘कृत’ के नाम से आये हैं, 8वीं एवं 9वीं शताब्दी से विक्रम संवत् का नाम विशिष्ट रूप से मिलता है, संस्कृत के ज्योतिष ग्रन्थों में शक संवत् से भिन्नता प्रदर्शित करने के लिए साधारण तौर पर केवल ‘संवत्’ (Samvat) नाम का प्रयोग किया गया है।

विक्रम संवत में महीने के नाम कुछ इस प्रकार होते है, महीनों के इन्हीं नामों को आज भी (Aaj Kaun Sa De Hai) हिन्दू धर्म में प्रयोग किया जाता है-

S.N.विक्रम संवत में महीनों के नामपूर्णिमा के दिन के नक्षत्र जिसमें चंद्रमा शामिल होता है
1.चैत्र (Chaitra)चित्रा, स्वाति
2.बैशाख (Baishakh)विशाखा, अनुराधा
3.जेष्ठ (Jyeshth)जेष्ठा, मूल
4.आषाढ़ (Ashadh)पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, सतभिषा
5.श्रावण (Shravan)श्रावण, धनिष्ठा
6.भाद्रपद (Bhadrapada)पूर्वाभाद्रपद, उत्तरभाद्रपद
7.आश्विन (Ashwin)अश्विन, रेवती, भरणी
8.कार्तिक (Karthik)कृत्तिका बदी, रोहणी
9.मार्गशीर्ष (Margashirsha)मृगशिरा, उत्तरा
10.पौष (Poush)पुनर्वसु, पुष्य
11.माघ (Magh)मघा, अश्लेशा
12.फाल्गुन (Falgun)पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त

विक्रम संवत्‌ में दिन की शुरुआत सुबह से मानी जाती है, यानि जब सूर्योदय होता है तब अगले दिन की शुरुआत मानी जाती है, हिन्दू कैलेंडर में नए वर्ष की शुरुआत लोहड़ी के समय चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को माना जाता है।

इस समय फसल को काट जाता है जिसको काटने के बाद ही नए वर्ष का उत्सव मनाया जाता है, ग्रेगेरियन कैलेंडर के हिसाब से लगभग फरवरी के अंत या मार्च के शुरुआत के समय हिन्दू नव वर्ष मनाया जाता है।

शक संवत्‌ –

शककाल का प्रारंभ 550 ईपू (ईसा मसीह के जन्म के पहले का वर्ष) में हुआ थ, जब उज्जैन के श्री हर्ष विक्रमादित्य ने शकों को युद्ध में हराया था तभी से इस संवत्‌ का प्रयोग आरंभ हुआ, यहाँ पर ध्यान दें कि संवत्‌, समयगणना का भारतीय मापदंड है।

लेकिन भारत में अनेक संवत्‌ प्रचलित हैं, जिसमें तीन मुख्य रूप से संवत्‌ चल रहे हैं, इसमें पहला प्रथम विक्रम संवत्‌ तथा दूसरा है शक संवत्‌ और तीसरा लोधी संवत भी प्रचलन में बीते सालों में आया है।

यह कैलेंडर युधिष्ठिर के मृत्युकाल 2526 वर्ष बाद शुरु हुआ और युधिष्ठिर का देहान्त 3102 ईसा पूर्व में हुआ था, यह सारा कालखंड श्रीकृष्ण (हिंदुओं में प्रचलित 33 कोटि देवी-देवताओं में से एक जिसे लोग आज भी पूजते है) के स्वर्गारोहण के एकदम बाद हुआ था, इस प्रकार इसकी तिथि 576 ईसा पूर्व भी निश्चित होती है।

कश्मीरी इतिहासकार तथा विश्वविख्यात ग्रंथ राजतरंगिनी के रचयिता “कल्हण” के अनुसार श्री हर्ष विक्रमादित्य, हिरण्य, मातृगृप्त तथा प्रवरसेन द्वितीय का समकालीन था, उसने उत्तर के सम्पूर्ण भारत पर अपना शासन सत्ता स्थापित किया।

उस ने शक लोगों को युद्ध में बहुत नुकसान पहुंचाया और बहुत बड़ी हार दी, तभी से शक सम्वत् का प्रारम्भ हुआ और इसी कारण इस श्री हर्ष को ‘ विक्रमादित्य ‘ की उपाधि मिली।

आज के दिन (Aaj Kaun Sa De Hai) जिस कैलेंडर को हम देख रहे है कालांतर में इसमें बहुत से बदलाव हुए है और समय के साथ हो रहे है, ताकि यह हमारे लिए सटीक समय गणना कर सके।

इस्लामिक या हिजरी संवत्‌-

इस्लामिक या हिजरी कैलेंडर के अनुसार इस्लाम को मानने वाले लोग मोहर्रम महीने की पहली तारीख को अपना नया साल (New Year) मनाते हैं।

हिजरी संवत् चंद्रमा पर आधारित कैलेंडर इसका उपयोग विश्वभर के इस्लामिक समुदाय के लोग करते हैं, हिजरी संवत् में कालगणना 354 व 355 दिन और बारह महीने के आधार पर बना है।

हिजरी संवत् का प्रारंभ इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगम्बर हजरत मुहम्मद के काल से माना गया है, और इस कैलेंडर का पहला वर्ष “हजरत मुहम्मद” की मक्का से मदीना की ओर की गई यात्रा से संबंधित है।

दुनियाभर के मुस्लिम समुदाय (Islamic Community) के लोग अपने त्योहार की तारीखों और सटीक समय के लिए ज्यादातर इसी कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।

नौरोज़ या नवरोज़ –

नौरोज़ या नवरोज़ (फारसी: نوروز‎‎ नौरूज़; शाब्दिक रूप से “नया दिन”), यह ईरानी नववर्ष का नाम है, पहले ईरान का नाम पर्शिया हुआ करता था, क्योंकि यहाँ पर पारसी समुदाय ही अधिकतर रहा करते थे।

समय के साथ बदलते समीकरण के साथ आज यह ईरान के नाम से जाना जाता है, प्राचीन परंपराओं व संस्कारों के साथ नवरोज़ का त्यौहार न केवल ईरान में ही नहीं बल्कि कुछ पड़ोसी देशों में भी मनाया जाता है।

इसके अलावा कुछ अन्य नृजातीय-भाषाई समूह जैसे भारत में रहने वाले पारसी समुदाय भी इसे नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं, जिस तरह से हम नए साल को ग्रेगेरीयन कैलेंडर के नए दिन (Aaj Kaun Sa De Hai) की शुरुआत के रूप में जानते है उसी तरह नवरोज का दिन पारसी कैलेंडर के नए साल की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है।

पारसी समुदाय के लोग नवरोज पर्व के मौके पर अपना नया साल मनाते है, नवरोज का पर्व मनाने की शुरुआत लगभग 3000 साल पहले शुरू हुई थी।

सिख नानकशाही कैलेंडर –

सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार 14 मार्च को होला मोहल्ला (Hola Mohalla) नया साल होता है, इसे वैशाखी पर्व के रूप में मनाया जाता है, वहीं सिंधी लोगों का नया साल चैत्र माह की द्वितीया तिथि को चेटीचंड उत्सव के तौर पर मनाया जाता है, इसके पीछे सिन्धी लोगों की मान्यता है कि इस दिन भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था।

जैन नववर्ष-

जैन धर्म में नए साल को निर्वाण संवत कहते हैं, ये नया साल दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है, जैन धर्म (Jainism) में इसको लेकर मान्यता है कि इससे एक दिन पहले ही महावीर स्वामी (Mahavir Swami) को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।

महावीर स्वामी जैन धर्म में एक प्रतिस्थित स्थान रखते है, जैन धर्म में उनका वह स्थान है जो बाकि के धर्मों उनके आराध्य का होता है, जिनकी लोग पूजा करते है।

सप्तर्षि संवत् –

यह भारत का सबसे प्राचीन संवत् है, धार्मिक ग्रंथों में यह जानकारी मिलती है कि लगभग 3076 ईसा पूर्व से संवत् प्रारंभ हुआ था, महाभारत काल तक इस संवत् का प्रयोग हुआ था, हालांकि बाद में इसका प्रचलन कम हो गया, सप्तर्षि संवत् में कालगणना (दिन, सप्ताह और महीनों की गिनती) सप्तर्षि तारों की गति के आधार पर की गई।

इस पर आधारित गणना का सिद्धांत था कि सप्तर्षि (सात तारों का एक समूह जो आसमान में रात के समय दिखता है) अपना एक चक्र करीब 2700 वर्ष में पूर्ण करते हैं यदि इसमें 18 वर्ष जुड़ जाऐ तो यह सौर वर्ष से गणना योग्य हो जाता है। इस तरह से लगभग 18 वर्ष के कालक्रम को एकत्रित कर गिना जाता था। (Google Aaj Kaun Sa De Hai)

एक समय था जब सप्तर्षि-संवत् अपनी विलुप्ति की कगार पर पहुंचने ही वाला था, लेकिन इसे विलुप्त होने से बचा लिया गया, इसको बचाने का श्रेय कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को जाता है, यह उल्लेख मिलता है कि कश्मीर में सप्तर्षि संवत् को ‘लौकिक संवत्’ कहते हैं और हिमाचल प्रदेश में ‘शास्त्र संवत्’ के नाम से इसे जाना जाता है।

जब से सृष्टि प्रारंभ हुई है, तभी से सप्तर्षि संवत् अपने अस्तित्व में आया है, प्राचीन काल में केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सप्तर्षि संवत् के कैलेंडर का प्रयोग होता था, हमारे पुराण, महाभारत, राजतरंगिणी, श्रीलंका का प्रसिद्ध ग्रंथ महावंश आदि इसके प्रमाण हैं।

इस संवत् का नामकरण सप्तर्षि तारों के नाम पर किया गया है जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ब्राह्मांड में कुल 27 नक्षत्र हैं, सप्तर्षि प्रत्येक नक्षत्र में 100-100 वर्ष रुकते हैं, इस तरह सप्तर्षि एक पूरा चक्र 2700 साल में करते हैं।

सौर गणना के साथ इस चक्र का तालमेल रखने के लिए इसके साथ 18 वर्ष और जोड़े जाते हैं, जिसमें कुल मिलकर 2718 वर्षों का एक चक्र बनता है, और इसी तरह एक चक्र की समाप्ति पर फिर से नई गणना प्रारंभ होती है, इन 18 वर्षों को संसर्पकाल कहते हैं, जब सृष्टि प्रारंभ हुई थी उस समय सप्तर्षि श्रवण नक्षत्र पर थे और आजकल अश्वनी नक्षत्र पर हैं, “महावंश” जि कि श्रीलंका का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है उसमें में एक जगह यह उल्लेख मिलता है-

जिन निवाणतो पच्छा पुरे तस्साभिसेकता।
साष्टा रसं शतद्वयमेवं विजानीयम् ॥

इसका अर्थ है सम्राट् अशोक का राज्याभिषेक (राजतिलक) सप्तर्षि कैलेंडर के अनुसार सप्तर्षि संवत् 6208 में हुआ।

माया कैलेंडर –

इस कैलेंडर की शुरुआत माया सभ्यता में हुई थी, लगभग 300 से 900 ईस्वी में मैक्सिको में यह सभ्यता अपने अस्तित्व में थी, माया सभ्यता के लोगों ने जब कालगणना की तो इसे माया कैलेंडर कहा गया।

माया कैलेंडर गणित और खगोलीय विज्ञान के आधार पर की गयी कालगणना पर आधारित कैलेंडर था, माया कैलेंडर बनाने वाली इस सभ्यता को इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसमें 21 दिसंबर 2012 के बाद की तिथि नहीं दी गई है। ऐसे में इसका अर्थ लगाया जाता रहा है कि, माया कैलेंडर इस दिन के बाद दुनिया की तबाही की ओर संकेत करता है।

साल 2012 में ऐसी बहुत सी अफवाहें फैली थी कि 21/12/2012 के बाद दुनिया का अंत हो जाएगा, जो कि इसी कैलेंडर के आधार पर लोगों ने यह अनुमान लगाया, जो कि सही नहीं था उसके कुछ समय बाद हमें “2012” के नाम से एक फिल्म देखने को मिलती है जो कि दुनिया की इसी तबाही के आधार पर बनी थी।

रविवार की छुट्टी कब शुरू हुई? –

आज के समय में (Aaj Kaun Sa De Hai) संडे की छुट्टी का बेसब्री से हम सबका इंतजार रहता है, चाहे हम स्कूल में पढ़ रहें हो या ऑफिस में जॉब कर रहे हो कहीं न कहीं रविवार का इंतजार सबको रहता है कि कब ये दिन आये और हमें आराम करने का मौका मिले, लेकिन काभी आपने सोचा है कि संडे की छुट्टी का इतिहास क्या है और रविवार की छुट्टी कब शुरू हुई?

दरअसल अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संस्था (International Organization for Standardization – ISO) के अनुसार रविवार का दिन सप्ताह का आखिरी दिन माना जाता है और इसी दिन कॉमन छुट्टी रहती है।

इस बात को 1986 में मान्यता दी गई थी लेकिन इसके पीछे ब्रिटिशर्स को कारण माना जाता है, ब्रिटेन में सबसे पहले स्कूल बच्चों को रविवार की छुट्टी देने का प्रस्ताव दिया गया।

और 1843 में अंग्रेजों के गवर्नर जनरल ने सबसे पहले इस आदेश को पारित किया था, इसके पीछे कारण दिया गया था कि बच्चे घर पर रहकर कुछ क्रिएटिव काम करें तो उनका मानसिक विकास होगया वे स्कूल में भी एक दिन की छुट्टी के बाद पढ़ने में मन लगा सकेंगे।

लेकिन भारत में इसकी कहानी अलग है, अंग्रेजों के शासनकाल एक बड़ा भारतीय मजदूर वर्ग हफ्ते के सातों दिन काम करते थे और इस कारण से मजदूरों की हालत खराब होती जा रही थी।

मजदूरों से इतना खराब वयहार किया जाता था कि कोई सोच भी नहीं सकता था, मजदूरों को खाने के लिए समय नहीं दिया जाता था, ईन सभी घटनाओं के बीच करीब 1857ई. में मजदूरों के नेता मेघाजी लोखंडे ने मजदूरों के लिए अपनी आवाज उठाई।

उनका यह कहना था कि सप्ताह में एक दिन ऐसा होना चाहिए जब मजदूर आराम करने के साथ-साथ खुद को अपने परिवार को व्यक्त दे सके जो कि सही भी था।

अंग्रेजों के जुर्म को देखते हुए, माना जाता है कि इसके बाद 10 जून, 1890 को मेघाजी लोखंडे का यह किया गया प्रयास सफल हुआ और अंग्रेजी हुकूमत को रविवार के दिन सबके लिए छुट्टी घोषित करनी पड़ी।

रविवार की छुट्टी को लेकर कई सारी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं भी हैं, हिंदू धर्म के हिसाब से हफ्ते की शुरुआत सूर्य (Sun) के दिन यानी रविवार से मानी जाती है।

वहीं अंग्रेजों की मान्यता है कि ईश्वर ने सिर्फ 6 दिन ही बनाए थे, इसी वजह से सातवां दिन आराम करने के लिए होता है, ज्यादातर मुस्लिम देशों में शुक्रवार को अल्लाह की इबादत का दिन माना जाता है।

इस कारण से वहां रविवार की जगह शुक्रवार को ही छुट्टी (Holiday) होती है, हालांकि अधिकतर देशों में रविवार को ही छुट्टी देखने को मिलती है।

साप्ताहिक बंदी किसे कहते है? –

जैसा कि नाम से समझ आता है साप्ताहिक बंदी यानि ऐसी छुट्टी जो सप्ताह में एक बार हो यह आमतौर पर हमें मार्केट में लगी दुकानों के बोर्ड पर देखने को मिलता है जिस किसी भी मार्केट में किसी दुकान पर साप्ताहिक बंदी के बारे में लिखा होता है वही दिन की छुट्टी उस मार्केट के हर दुकान के ऊपर होती है।

आपके मन में यह आ रहा होगा कि जब रविवार की छुट्टी हमें निर्धारित की गयी है तो साप्ताहिक छुट्टी की जरूरत क्यों पड़ी, तो इसके पीछे कारण यह है कि अगर एक ही दिन सारे कामकाज ठप हो जाएंगे तो लोग बाकी के काम कैसे कर पाएंगे।

जैसे किसी व्यक्ति को रविवार को छुट्टी मिलती है तो उसके लिए तो समस्या हो जाएगी किसी जरूरी काम को लेकर, यह केवल एक कारण है ऐसे कई कारण हो सकते है, साप्ताहिक छुट्टी को लेकर।

यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि यह साप्ताहिक छुट्टी वहीं पर देखने को मिलती है जहां रविवार को छुट्टी देखने को नहीं मिलती है।

इन सबमें कुछ बिजनेस ऐसे भी है जिन्हें इन सबसे बाहर रखा गया है, जैसे हॉस्पिटल में 24*7 कभी भी चिकित्सा सुविधा ले सकते है, यहाँ पर वर्कर को साप्ताहिक छुट्टी मिलती है वे सात दिनों में किसी भी दिन (Google Aaj Kaun Sa De Hai) अपनी छुट्टी को चुन सकते है, जिसके बाद उनकी ड्यूटी उसी के हिसाब से चलती है।

वीकेंड और वीक डेज़ में क्या फर्क है?

काम करने वाले दिन को हम वीक डेज कहते है, वीक डेज के अंतर्गत 5 दिन सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार आते है, ये वो दिन है जिसमें लोग जॉब पर या कहीं भी वर्क कने के लिए जाते है।

इसके अलावा बचे दो दिन शनिवार और रविवार को वीकेंड कहा जाता है क्योंकि ये सप्ताह के दो अंतिम दिन होते है, शनिवार की छुट्टी अलग-अलग जगहों पर होती है जैसे किसी जगह पर शनिवार को भी छुट्टी रहती है, तो कहीं पर इस दिन हाफ डे वर्क रहता है और कहीं पर शनिवार को छुट्टी नहीं भी होती है, इसके अलावा रविवार को सभी जगहों पर छुट्टी देखने को मिलती है।

Summery Of The Article –

तो दोस्तों, आज कौन सा डे है (Google Aaj Kaun Sa De Hai) इससे जुड़ी जानकारियों के बारे में यह आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं और यदि इस टॉपिक से जुड़ा आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो उसे नीचे कमेन्ट बॉक्स में लिखना न भूलें, इस आर्टिकल को लिखने में पूरी सावधानी रखी गयी है, फिर भी किसी प्रकार कि त्रुटि पाए जाने पर कृपया हमें जरूर बताएं।

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Aaj Kaun Sa De Hai आज कौन सा दिन है?

आज कौन सा दिन है इसके बारे में जानकारी नीचे इस लिंक पर क्लिक करके, लाइव चल रही घड़ी और कैलेंडर के बारे में देख सकते है…

इस पोस्ट में घड़ी Indian Standard Time (IST) के अनुसार बिल्कुल लाइव समय में वर्तमान दिन (वार), दिनांक, महीना और वर्ष को बताता है, Indian Standard Time या भारतीय मानक समय क्या होता है इसके बारे में हमने नीचे बात की है।

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