PM Svamitva Yojana in Hindi स्वामित्व योजना क्या है? लाभ, पात्रता, ऑनलाइन पंजीकरण, 10 Best Benifits of Svamitva Yojana

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अक्सर देखा जाता है कि गावों में रहने वाले लोगों कि बहुत सारी समस्याओं में से एक समस्या जमीन को लेकर होती है, जिसके कारण अक्सर आए दिन लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है, चाहे जमीन के मालिकाना हक को लेकर समस्या हो या सरकार को सही लोगों तक योजनाओं को पहुंचाना हो ऐसी बहुत सी समस्याएं आती रही है, जमीन को लेकर।

लेकिन अब जल्द ही यह समस्या दूर होने वाली है, भारत सरकार की नई स्कीम प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना की मदद से, आने वाले समय में यह योजना बहुत मददगार साबित होने वाली है।

Hello Friends, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर आज हम बात करते जा रहे है, प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के बारे में… स्वामित्व योजना क्या है? इसके क्या फायदे है? इसे कब शुरू किया गया है? इस योजना का लाभ कैसे लें? और यह योजना ग्रामीण इलाकों में किस तरह मददगार साबित हो सकती है? जानेंगे इन सारी चीजों के बारे में, उम्मीद करता हूँ आपको यह पसंद आएगा।

PM Svamitva Yojana in Hindi
PM Svamitva Yojana in Hindi

कहा जाता है भारत गावों का देश है जहां अधिकतर आबादी गावों में बसती है, क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत 7 वें नंबर पर आता है, आजादी के बाद से कई बार भारत में भूमि सुधार कार्यक्रम चलाए गए जिसमें लोगों की कई जगह पर बिखरी हुई जमीनों को एक जगह पर लाने का कार्य किया गया।

ताकि लोगों को आपनी जमीन का उपयोग करने में आसानी हो सके लेकिन इस तरह चलाई गयी कई चकबंदी योजनाओं उसके बाद, समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रम के अभाव की वजह से लोगों की जमीनों के मालिकाना हक को लेकर समस्याएं आती रही है, अभी वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों की संख्या में ऐसे लोग है।

जिनकी जमीन को लेकर कई सारी समस्याएं है, जिनको जल्द से जल्द ठीक किया जाना चाहिए और भारत सरकार की तरफ से शुरू की गयी स्वामित्व योजना लोगों की इसी समस्याओं को ठीक करने के लिए शुरू की महत्वकांक्षी योजना है।

स्वामित्व योजना क्या है? (Svamitva Yojana in Hindi)

केंद्र सरकार के द्वारा शुरू की गयी यह स्वामित्व योजना (Svamitva Yojana – Survey of Village Abadi And Mapping With Improvised Tech in Village Areas), भारत के सभी ग्रामीण इलाकों में जमीन की माप करने और उसके मालिकों की पहचान करने के लिए बनाई गयी है।

जिसकी मदद से किसी व्यक्ति की को न सिर्फ उसकी जमीन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी, बल्कि यह उस किसान या आम आदमी के लिए बहुत सारी संभावनाओं के द्वार खोलेगी।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री (पंचायती राज मंत्री) श्री गिरिराज सिंह जी (Union Minister of Panchayati Raj and Rural Development ) ने इस योजना का 14 सितम्बर 2021 को इस योजना का उद्घाटन किया था, इससे पहले साल 2020 में नौ राज्यों में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शामिल किया गया था।

जहां से मिले डाटा और रिस्पॉन्स के आधार पर इस योजना की सम्पूर्ण रूपरेखा तैयार करने में मदद मिली, जिसकी सफलता के आधार पर यह अब वृहद रूप में देखने को मिल रहा है।

नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शुरू की गयी यह स्वामित्व योजना, भारत के भारत के सभी गावों में मौजूद जमीन को अत्याधुनिक मशीनों जैसे – ड्रोन इत्यादि से नापने और उसका रिपोर्ट कार्ड बनाने को लेकर शुरू की गयी है।

प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि अगले तीन-चार वर्षों में पूरे देश के हर घर को प्रॉपर्टी कार्ड मिल जाएगा, जिसके लिए काम किया जा रहा है।

जमीन का यह रिपोर्ट कार्ड कुछ आधार कार्ड के जैसा होगा, जिसपर जमीन से जुड़ी सारी जानकारी मौजूद होगी और उसे जब चाहे भारत सरकार के डेटाबेस में मौजूद डाटा से आसानी से मिलकर वेरफाइ किया जा सकता है।

तो कुल मिलकर यह बात करें तो इस योजना के कई सारे फायदे ही फायदे है, जो आने वाले समय कई सारी समस्याओं का हल बनने वाला है।

“राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस” के मौके पर 24 अप्रैल 2020 को हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भू मालिकों को स्वामित्व योजना के तहत सम्पति कार्ड वितरित करने की घोषणा थी।

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत देश के लगभग एक लाख प्रॉपटी धारको के मोबाइल फ़ोन पर एसएमएस के माध्यम से एक लिंक भेजा जायेगा, जिसके माध्यम से देश के प्रॉपटी धारक अपना प्रॉपटी कार्ड डाउनलोड कर सकते है।

इसके बाद संबंधित राज्य सरकारें संपत्ति कार्ड का वितरण गांव-गांव के हिसाब से जाकर करेंगी, गांव के लोगों को इस योजना के माध्यम से अब बैंक से लोन मिलने में भी आसानी होगी।

बीते साल 11 अक्टूबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हरियाणा के 221, उत्तर प्रदेश के 346, महाराष्ट्र के 100, मध्य प्रदेश के 44, उत्तराखंड के 50 और कर्नाटक के दो गांवों के नागरिकों को आबादी की जमीन के मालिकाना हक का कागज सौंपा, जिसमें कुल आंकड़ों की बात करें तो 6 राज्यों के 763 गावों में प्रॉपर्टी कार्ड का वितरण का शुभारंभ किया।

जैसा कि हमने पहले भी बात की है, इस योजना के माध्यम से लोगों की संपत्ति का डिजिटल ब्यौरा रखा जा सकेगा, स्वामित्व योजना के अंतर्गत राजस्व विभाग द्वारा गांव की जमीन की आबादी का रिकॉर्ड एकत्रित करना शुरू कर दिया गया है।

इसी के साथ विवादित जमीनों के मामले के निपटारे के लिए डिजिटल अरेंजमेंट (Digital Arrangement) भी राजस्व विभाग (Revenue Department) द्वारा शुरू किया गया है।

योजना के Highlights –

योजना का नाम स्वामित्व योजना
विभाग पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj and Rural Development)
घोषणा और आरंभ तिथि प्रधानमंत्री मोदी जी के द्वारा 24 अप्रैल 2020 को
उद्देश्य लोगों को जमीन के मालिकाना हक के कागज प्रदान करना, जिससे कि गावों में विकास के नए रास्ते खोले जा सके
ऑफिसियल वेबसाईट eGramSwaraj.nic.in

हमें इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी?

जैसा कि हम सभी जानते कि आज के समय में ग्रामीण इलाकों में जमीन को लेकर बहुत सारे केस देखने को मिलते है, यह योजना अभी के लिए समय की मांग और सही समय पर हमारे प्रधानमंत्री जी ने यह कदम उठाया जो कि सराहनीय है।

1. अक्सर गावों में ज्यादातर झगड़े जमीन को लेकर ही होते है और इसके पीछे एक बड़ा कारण भी है और वह है कि लोगों को अपनी जमीन के बारे में जानकारी ही नहीं है, और सरकारी तौर पर ये चीजें इतनी मुश्किल होती है कि लोगों को समझ मे नहीं आती है।

2. अक्सर गावों में ज्यादातर झगड़े जमीन को लेकर ही होते है और इसके पीछे एक बड़ा कारण भी है और वह है कि लोगों को अपनी जमीन के बारे में जानकारी ही नहीं है, और सरकारी तौर पर ये चीजें इतनी मुश्किल होती है कि लोगों को समझ मे नहीं आती है।

3. गावों में लोगों के पास अपनी पुश्तैनी जमीन से जुड़ा कोई भी कागजात लोगों के पास नहीं होता है, जो जमीन है उनके पिता के नाम पर है, दादा के नाम पर है, परदादा के नाम पर है, ये व्यवस्था इतनी पुरानी हो चुकी है कि इसमें बदलाव किया जाना जरूरी है।

4. गावों में लोगों को जमीन से जुड़े कागजों के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है, लोगों को केवल ये पता होता है कि ये जमीन मेरी वो जमीन मेरी है लोग पूरी तरह शयोर नहीं होते कि उनकी जमीन कहां कहां है ऐसे ही टुकड़ों-टुकड़ों में न जाने ऐसे ही कितनी जमीनें पड़ी है।

5. कई बार तो ऐसा देखने को मिलता है कि किसी व्यक्ति की जमीन पर कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद है और दूसरे व्यक्ति की जमीन पर कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद है, तीसरे व्यक्ति की जमीन पर कोई चौथा व्यक्ति मौजूद है, लोगों को ये भी नहीं पता कि वास्तव में उनके जमीन की सीमा कहां तक है।

6. लोगों की नासमझी और एक दूसरे के प्रति झगड़े की भावना अंततः बड़े झगड़े में बदल जाती है और इसका परिणाम दोनों परिवारों को आर्थिक, मानसिक नुकसान का कारण बनता है।

7. जमीनों को लेकर होने वाले झगड़े प्रति वर्ष भारत में होने वाले मुकदमों का कारण बनते है, अभी के समय में पूरे भारत में तीन करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग है, जिनमें जमीनों के झगड़ों की भी अच्छी खासी संख्या है।

8. जमीन की मालिकाना हक को लेकर, जानकारी के अभाव में लोगों के बीच झगड़े हो जाते है, ग्रामीण इलाकों में यह समस्या अक्सर देखने को मिलती रहती है, ऐसा नहीं नहीं है कि ये सारी चीजें जानबूझकर की गयी है, दरअसल सालों से लोग जमीनी सीमा के बारे में भूल जाते है कि वे कहां पर है और इसी तरह पीढ़ियाँ गुजर गयी उन्होंने भी अपनी जमीन के बारे में जानने की जरूरत नहीं दिखाई।

9. अब धीरे-धीरे शिक्षा के जरिए जब जागरूकता फैली तो लोगों को समझ में आया कि हमारे साथ तो गलत हो रहा है जिसका नतीजा पारिवारिक झगड़ा, पुलिस बाद में एक और नया कोर्ट केस होता है।

10. कई बार भू स्वामी अपनी जमीन का सही रूप से लाभ नहीं ले पाते है, जरूरी कागजात न होने के कारण उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जमीन का मालिकाना हक न साबित कर पान उन्हें मुश्किल में डाल सकता है।

11. सरकार किसी भी व्यक्ति के आर्थिक स्थिति का सही तरीके से आंकलन नहीं कर पाती है, इसलिए किसी भी योजना को सही लोगों तक पहुंचाने में परेशानी होती है, जिसका कारण कई लोग राज्य सरकार और केंद्र सरकार के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का गलत रूप से इस्तेमाल करते है।

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स्वामित्व योजना के क्या फायदे है?

1. स्वामित्व योजना से संपतियों का रिकार्ड रखने में मदद मिलेगी, अभी किसी भी संपत्ति का डिजिटल रिकार्ड रखने की कोई सुविधा नहीं है, इसे जब चाहे स्मार्टफोन पर भी इंटरनेट के माध्यम से आसानी से वेरफाइ किया जा सकेगा, जिससे सरकारी दफ्तरों में न जाने पर कीमती समय बचेगा।

2. ग्रामीण इलाकों के लोगों को अपनी जमीन के बारें में जानकारी और मालिकाना हक मिलेगा, जिससे उन्हें कई सारे फायदे मिलेंगे, जो उनका सर्वांगीण विकास करने में सहायक सिद्ध होगा।

3. जमीन का रिपोर्ट कार्ड बनने से मालिक अपनी जमीन पर रोजगार, उद्योग-धंधे, आसानी से शुरू कर पाएंगे।

4. व्यक्ति अपनी जमीन को आसानी से बेच और खरीद सकेंगे, अभी तक कागज को लेकर बहुत बड़ी समस्या होती थी, जिसके लिए कोर्ट केस भी बनते थे, जमीन की मालिकाना हक सही से न साबित होने के कारण खरीदने और बेचने वाले दोनों को ये समस्या रहती थी कि कोई तीसरा न इसमें शामिल हो जाये।

रिपोर्ट कार्ड यह सुनिश्चित करता है कि वही व्यक्ति मालिक है जीका कार्ड बना है, इससे न सिर्फ पारदर्शिता आएगी बल्कि लोग कानूनी दांव पेंच से बचते हुए अपने जमीन को बेच और खरीद सकते है।

5. सरकार को सही परिवार और लोगों तक योजनाओं को पहुंचाने में आसानी होगी, बीते समय में भारत सरकार और राज्य सरकार के द्वारा चलाई गयी ऐसी बहुत सी योजनाओं के दुरुपयोग की खबरें आती रही है, जिसे सही करने के लिए भू स्वामित्व योजना काफी कांगर साबित हो सकेगी।

6. इस योजना के माध्यम से अधिक से अधिक लोग कर के दायरे में या सकेंगे जिससे राजस्व में इजाफा होगा, क्योंकि जमीनों का सही तरीके से रिकार्ड न बनने से बहुत से लोग कर दायरे से बाहर थे, स्वामित्व योजना के बाद ऐसे लोगों को ट्रैक कर पान बहुत आसान हो जाएगा, जिन्हें कर देना चाहिए।

7. जमीन का रिपोर्ट कार्ड बनाने से लोग अपनी जमीन के माध्यम से आसानी से लोन ले सकेंगे, अभी तक कोई किसान को लोन लेने के कई सारी मुश्किलें आती थी, उन्हें आसानी से लोन नहीं मिलता था।

8. जमीनी सीमा को लेकर होने वाले झगड़ों में कमी आने से सरकार के द्वारा लगाए जा रहे रिसोर्सेज के उपयोग में कमी आएगी जिससे उस मानव श्रम का कहीं और सदुपयोग किया जा सकता है।

9. लोगों को महंगे मुकदमे लड़ने से आजादी मिलेगी, जिससे वे खुद का विकास कर पाने में ज्यादा सक्षम होंगें।

10. गावों का विकास करने में सहायता मिलेगी, अभी तक अधिकतर गावों में जब भी किसी नए योजना के तहत गावों में कोई स्ट्रक्चर जैसे- स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन या दूसरी सार्वजनिक सुविधाएं आदि, का निर्माण करना होता था तो ये सारी चीजें कैसे होगी? कहां होगी? किस तरह से अधिक लोगों तक इनकी पहुँच हो? इसका कोई हिसाब-किताब नहीं होता था, गांव में बैठे, बाबू, ग्राम पंचायतें इत्यादि अपने हिसाब से ये सारी चीजें बना देते थे।

11. स्वामित्व योजना कि मदद से ग्राम पंचायतों का भी नगर पालिका और नगर निगम की तरह व्यवस्थित तरीके से गावों का मैनेजमेंट करना आसान होगा, वो गाँव कि सुविधाओं के लिए सरकार से मिल रही सुविधाओं के साथ, गाँव में ही संसाधन भी जूता पाएंगे, यह पहल ग्राम पंचायतों को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

जमीन का रिपोर्ट कार्ड क्या है?

किसी भी जमीन का रिपोर्ट कार्ड उस जमीन के बारे में पूरी जानकारी बताता है, जिसे व्यक्ति का नाम, पूरा पता, उस जमीन की जियो लोकेशन ( Latitude Longitude ), ड्रोन मैपिंग डाटा , लैंडमार्क जैसी चीजें हो सकती है।

इतना ही नहीं यह सारी जानकारी भारत सरकार के एक सर्वर पर मौजूद रहेगी जिसे जब चाहे इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है, ताकि जरूरत के समय पर आपको कहीं किसी सरकारी दफ्तर न जाना पड़े।

यह योजना कैसे काम करती है?

स्वामित्व योजना को चरणबद्ध तरीके से किया जाना है, इस योजना को चार सालों 2020 से 2024 के बीच पूरा किया जाना है, योजना के तहत देश के 6.62 लाख गावों को कवर किया जाएगा।

जिसके शुरुआती चरण यानि पायलट प्रोजेक्ट में एक लाख गांव गावों को 2020-2021 के दौरान कवर किया गया था, पायलट प्रोजेक्ट के दौरान उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, के गावों के साथ पंजाब और राजस्थान के कुछ सीमावर्ती गाँव शामिल किये गए थे।

देशभर में करीब 300 नियमित प्रचालन प्रणाली स्टेशन (CORS) नेटवर्क की स्थापना होगी, स्वामित्व योजना ड्रोन और नए सर्वेक्षण विधियों का उपयोग करके गावों में बसी हुई भूमि या घरों का नक्शा बनाने में मदद करती है।

इस पूरे प्रोजेक्ट में ड्रोन के जरिए प्रॉपर्टी के सर्वे के लिए सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) नोडल एजेंसी के रूप में काम रही है।

योजना के तहत ग्रामीण इलाकों का सीमांकन ड्रोन तकनीक के जरिए किया जायेगा, जिसके जमीन के मालिकों का एक मालिकाना हक रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट में गाँव की सभी संपत्ति की मैपिंग करने का प्रावधान रखा गया है, साथ ही ePortal के जरिए जमीन के मालिकाना हक की सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था की गयी है।

CORS नेटवर्क क्या है?

CORS का फुल फॉर्म है, कंटीन्यूअस ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन जो कि नेटवर्क स्टेशनों के लिए रेफरेंस के रूप में एक वर्चुअल बेस स्टेशन का काम करता है जो लंबी दूरी के उच्च-सटीकता नेटवर्क (long-range high-accuracy Network, RTK corrections) तक पहुंचने की क्षमता देता है।

PM Svamitva Yojana in Hindi
PM Svamitva Yojana in Hindi, CORS Network System

ये कंटीन्यूअस ऑपरेटिंग रेफरेंस नेटवर्क, RTK यानि Real-time Kinematic को एक बड़े क्षेत्र में कार्य करने के लिए, डाटा प्रोसेसिंग और नेटवर्क बनाये रखने की क्षमता देते है, साथ ही CORS के मौजूद रहने से डाटा की सटीकता बढ़ जाती है।

क्योंकि इस पूरे सिस्टम में एक से अधिक स्टेशन सही स्थिति सुनिश्चित करने में मदद करते हैं, जिससे गलतियों से बचने में मदद मिलती है, सिंगल बेस के स्टेशन की तुलना में।

इतना ही नहीं इस पूरे सिस्टम में CORS के साथ-साथ सेटेलाइट की भी मदद ली जाएगी, जिससे कि पिन पॉइंट की एक्यूरेसी के साथ सही डाटा के निर्माण में मदद मिलेगी, यहाँ पर RTK (Real-time Kinematic) का मतलब सेटेलाइट से है जो कि CORS के साथ मिलकर डाटा प्रवाइड कराते है।

क्योंकि इस योजना के तहत 300 से अधिक कंटीन्यूअस ऑपरेटिंग रेफरेंस स्थापित किये जाने है इसलिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के द्वारा इन सभी CORS नेटवर्क की स्थापना की जाएगी।

CORS नेटवर्क के फायदे –

CORS नेटवर्क ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट्स स्थापित करने में सहायता करता है, जो सटीक Geo-referencing के लिए एक महत्वपूर्ण गतिविधि है, जमीन भूमि की सत्यता और सीमांकन करने में मदद मिलेगी।

एक बार CORS नेटवर्क स्थापित हो जाने के बाद, इसका उपयोग कोई भी कर सकता है जैसे – राज्य एजेंसी/विभाग अर्थात राजस्व विभाग, ग्राम, पंचायत (जीपी), लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, कृषि, जल निकासी और नहर, शिक्षा, बिजली, जीआईएस आधारित सर्वेक्षण और कार्यान्वयन/उपयोग के लिए जल, स्वास्थ्य आदि विभागों में Geo-referencing के लिए काम में लिया जा सकता है।

इससे संबंधित किसी भी सर्वेक्षण के लिए CORS नेटवर्क के उपयोग की सुविधा होगी सड़क निर्माण, सिंचाई कार्य और आधारभूत संरचना जैसी गतिविधियाँ आदि।

CORS नेटवर्क को इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट में भी स्थापित किया गया है, यह योजना पड़ोसी राज्यों कि सीमा को भी कवर करता है, इसलिए ऐसी जगहों पर भी Geo-referencing के जरिए एक्यूरेट डाटा प्राप्त किया जा सकता है।

PM Svamitva Yojana के अंतर्गत सर्वे प्रक्रिया –

जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि इस योजना के अंतर्गत ड्रोन के माध्यम से सर्वे किया जाता है, तथा इस सर्वे की प्रक्रिया को कई चरणों में किया जाता है, इसमें सबसे पहले जीपीएस से युक्त ड्रोन की मदद से क्षेत्र का सर्वे किया जाता है।

इस सर्वे के माध्यम से गांव में बने हर घर की jio Tagging की जाती है और प्रत्येक घर का क्षेत्रफल कितना है ये सारा डाटा दर्ज किया जाता है, डाटा को एकत्र करने के बाद प्रत्येक घर को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाती है, आईडी उस घर का पता भी होता है, इसके साथ ही इस योजना के माध्यम से लाभार्थी का पूरा पता Digital भी हो जाता है, क्योंकि अब आधार की तरह घर की भी जानकारियाँ डिजिटल रूप से वेरीफाइ की जा सकती है।

सर्वे की प्रक्रिया के दौरान…. गांव के जमीन मालिक, राजस्व विभाग के अधिकारी, ग्राम पंचायत के सदस्य तथा पुलिस की टीम मौजूद रहती है, जिससे कि लोगों की आपसी सहमति से उन्हें अपने दावे की जमीन प्रदान की जा सके, इसके बाद दावे वाली जमीन पर निशानदेही की जाती है।

इन सबके बाद अगले चरण में जमीन मालिक चूना लगाकर अपने क्षेत्र पर घेरा बना लेता है, इसकी तस्वीर Drone से खींची जाती है, इसके साथ ही ड्रोन के द्वारा यह प्रक्रिया गांव के चक्कर लगाकर पूरी की जाती है, जिसके बाद कंप्यूटर की सहायता से जमीन का नक्शा तैयार किया जाता है।

स्वामित्व योजना में लाभार्थियों को अपनी आपत्ति दर्ज करने का समय –

जिस भी गांव का Survey कराया जाता है उस गांव के नागरिकों को पहले से सूचना दी जाती है, जिससे कि वह सभी लोग जो गांव से बाहर हैं वह Survey वाले दिन गांव में उपस्थित हो सके, इसके कुछ दिनों के पश्चात सर्वे करने वाली टीम के द्वारा गांव का पूरा नक्शा तैयार किया जाता है।

मैप बनने के बाद उन सभी लोगों को जिनके नाम पर जमीन है उनके नाम की जानकारी पूरे गांव के लोगों को दी जाती है, वह सभी नागरिक जिन्हें अपनी आपत्ति दर्ज करानी होती है वह कम से कम 15 दिन तथा अधिक से अधिक 40 दिन के अंतर्गत अपनी आपत्ति (परेशानी) दर्ज करवा सकते है।

वह सभी गांव जहां पर सभी व्यक्तियों की सहमति होती है वहाँ पर आगे के सारे स्टेप्स पूरे करने के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा जमीन के कागजात जमीन के मालिक को प्रदान कर दिए जाते हैं।

ये सारी प्रक्रिया हमने आपको कुछ ही लाइनों में बता दी है लेकिन, वास्तविकता में इसमें शुरू से अंत तक कंप्लीट होने में लगभग तीन हफ्ते तक का समय लगता है, उसमें भी यदि किसी जमीन को लेकर कोई विवाद है तो उसके सुलझने तक भी बाकी का काम पेंडिंग रह सकता है।

हालांकि सरकार और अन्य सभी ऑफिसियल का यह प्रयास रहता है कि बिना किसी झगड़े और परेशानी के यह सारा काम तय समय में पूरा किया जा सके और एक आम नागरिक के चलते हमारी भी यही जिम्मेदारी बनती है कि विवेकपूर्ण काम लें, और सरकार के जनहित योजनाओं के क्रियान्वन में अपना सहयोग दें।

जमीन के मालिकाना हक के कागजात राजस्व विभाग (Revenue Department) की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी डाउनलोड किए जा सकते हैं, राज्य सरकार द्वारा ज़मीनों के मालिकाना हक के लिए अपने कानून भी बनाए जा सकते हैं।

हरियाणा सरकार द्वारा भी यह कानून बनाया गया है कि जमीन की पूरी जवाबदेही ग्राम पंचायत के द्वारा की जाएगी, इस स्थिति में यदि जमीन को लेकर कोई भी विवाद उत्पन्न होता है तो उस विवाद को हल करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है।

स्वामित्व योजना के लिए कैसे आवेदन करें?

इस योजना के बारे में सारी जानकारी हमने बता दी है, इसका कैसे लाभ ले सकते है इसके बारे में इस विडिओ में बताया गया है, जिसे आप देख सकते है –

स्वामित्व योजना 2021–22 के लिए स्वीकृत किया गया बजट –

वर्ष 2021–22 के लिए पंचायती राज मंत्रालय (Panchayati Raj and Rural Development) को 913.43 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया हैं, यह बजट पिछले फाइनेंशियल वर्ष की तुलना में 32% ज्यादा है, जिसके कारण स्वामित्व योजना के लिए कुल 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गयी है।

पिछले साल इस योजना का बजट 79.65 करोड़ रुपये रखा गया था जिसे बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है, बजट के इस बढ़ोत्तरी के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि पिछले साल इस योजना के अंदर 9 राज्यों को जोड़ा गया तथा इस साल कुल 16 राज्यों को एड किया गया है।

सभी टास्क को सुचारु रूप से करने के लिए विभिन्न राज्यों में लगभग 130 ड्रोन की टीम तैनात की गयी है, जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग इस स्कीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है अतः ये सभी टीमें भारतीय सर्वेक्षण विभाग के द्वारा तैनात करी गयी है।

इतना ही नहीं लक्ष्य को आगे बढ़ाकर 500 ड्रोन की टीम रखने का लक्ष्य रखा गया है जिससे कि तय समय सीमा के अंदर काम को पूरा किया जा सके।

Summery Of The Article –

तो दोस्तों स्वामित्व योजना (PM Svamitva Yojana in Hindi) के बारे में यह आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं और यदि इस योजना से जुड़ा आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो उसे नीचे कमेन्ट बॉक्स में लिखना न भूलें, इस आर्टिकल को लिखने में पूरी सावधानी रखी गयी है, फिर भी किसी प्रकार कि त्रुटि पाए जाने पर कृपया हमें जरूर बताएं और ज्यादा जानकारी के लिए ऑफिसियल पर जाएँ।

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स्वामित्व कार्ड क्या है?

किसी भी जमीन का रिपोर्ट कार्ड उस जमीन के बारे में पूरी जानकारी बताता है, जिसे व्यक्ति का नाम, पूरा पता, उस जमीन की जियो लोकेशन ( Latitude Longitude ), ड्रोन मैपिंग डाटा , लैंडमार्क जैसी चीजें हो सकती है, इतना ही नहीं यह सारी जानकारी भारत सरकार के एक सर्वर पर मौजूद रहेगी जिसे जब चाहे इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है, ताकि जरूरत के समय पर आपको कहीं किसी सरकारी दफ्तर न जाना पड़े।

स्वामित्व योजना का कब शुभारंभ हुआ था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर इस योजना की शुरुआत की थी।

स्वामित्व योजना से जुड़ी आधिकारिक वेबसाईट क्या है?

egramswaraj.gov.in पर जाकर इस योजना के बारे में, विस्तृत जानकारी और रजिस्ट्रेशन जैसी इस योजना से जुड़ी सभी जरूरी चीजें की जा सकती है।

किस माध्यम से जमीन का सर्वेक्षण किया जाएगा?

ड्रोन तथा, कंटीन्यूअस ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) जैसी आधुनिक तकनीक के माध्यम से इस योजना को किया जा रहा है, जिससे बिना किसी त्रुटि के सही डाटा प्राप्त किया जा सके।

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