Podcast Kya Hai? पॉडकास्ट कैसे शुरू करें?, 5 Best Benefits, Podcast Meaning in Hindi

Podcast Kya Hai | Podcast Meaning in Hindi | Podcast Kaise Start Kare | Podcast Se Paise Kaise Kamaye

समय के साथ चीजें बदलती रहती है और वह पहले से भी अपने स्वरूप में एडवांस होती चली जाती है, यह अनुभव आप अपने आसपास बदलती चीजों को देखकर कर सकते है।

और जब बात टेक्नोलॉजी की हो तो आज के समय मे यह एक ऐसा क्षेत्र है तो बहुत ही तेजी के साथ अपडेट हो रहा है और इसी टेक्नोलॉजी के अंतर्गत आता है ‘पॉडकास्टिंग’।

Hello Friends, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर… आज हम बात करने जा रहे है, पॉडकास्टिंग (Podcast Meaning in Hindi) के बारे में कि, पॉडकास्ट क्या है? (Podcast Kya Hai?) पॉडकास्टिंग के क्या फायदे है? पॉडकास्टिंग कैसे शुरू करें? पॉडकास्टिंग से पैसे कैसे कमाएं? और भविष्य में इसकी क्या संभावनाएं हैं? जानेंगे इन सारी चीजों के बारे में उम्मीद करता हूँ आपको यह पसंद आएगा।

Podcast Kya Hai, Podcast Meaning in Hindi
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Podcast Kya Hai? पॉडकास्ट क्या है? –

पॉडकास्ट एक ऑनलाइन “ऑडिओ ब्रॉडकास्टिंग सर्विस” है, यह एक ऑडिओ बेस्ड सर्विस है जहां पर आपको आवाज के रूप में कंटेन्ट सुनने को मिलता है, पॉडकास्ट को इंटरनेट रेडियो भी कहा जाता है।

इसकी शुरुआत, एप्पल कंपनी के फाउन्डर “स्टीव जॉब्स” ने अपने प्रोडक्ट iTunes और iPod के लिए की थी।

Podcast’ शब्द iPod के ‘Pod’ और Brodcast के ‘Cast’ शब्द को मिलाकर बनाया गया है जिसे साल 2005 में एप्पल के एक ईवेंट में “स्टीव जॉब्स” इसको लांच किया।

भारत मे पॉडकास्टिंग की शुरुआत 2006 में हुई थी, उस समय यह पुराने नोकिया के सिम्बियन फोन्स में देखने को मिलता था, हालांकि उस समय यह उतना पॉपुलर नही था।

लेकिन आज के समय में भारत में भी लोग इसके बारे में रुचि ले रहे है और अब यह धीरे-धीरे भारत में भी काफी तेजी से प्रसिद्ध हो रहा है।

जब से इसकी शुरुआत हुई तभी से यह भारत से बाहर पश्चिमी देशों में यह बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है जैसे कि हम आज के समय में यूट्यूब को जानते है।

Podcast Meaning in Hindi –

पॉडकास्ट से हमारा मतलब (Podcast Meaning in Hindi) एक ऐसी मीडिया फाइल से है जो कि इंटरनेट पर फीड के द्वारा प्रसारित की जाती है जिसे कि कंप्यूटर तथा पोर्टेबल मीडिया प्लेयरों जैसे आईपॉड तथा स्मार्टफोन आदि द्वारा चलाया जा सकता है।

तथा इस प्रक्रिया को पॉडकास्टिंग कहा जाता है, इस मीडिया फाइल को बनाने और प्रसारित करने वाले व्यक्ति को पॉडकास्टर कहा जाता है।

पॉडकास्टिंग के क्या फायदे हैं?-

आपके मन यह विचार आ रहा होगा कि केवल ऑडियो सुनने से क्या होगा, तो मैं आपको बता दूं यह भी उतना ही पॉवरफुल और उपयोगी माध्यम है जितना की कोई अन्य प्लेटफॉर्म।

ऐसी चीजें जिन्हें ऑडिओ के रूप में सुनकर सीखा जा सकता है, पॉडकास्टिंग के माध्यम से यह संभव है, जैसे- कहानियाँ, मोटिवेशनल स्टोरी, न्यूज, किसी मुद्दे पर विचार, ऑडिओ के माध्यम से सीखने वाले कंटेन्ट इत्यादि।

केवल इतना ही नहीं इसके अलावा इसके और भी बहुत सारे फायदे है, जिसके कारण आने वाले समय में यह अन्य सोशल मीडिया की तरह पॉपुलर होने वाला है।

भले ही आपको सुनने में अजीब लगे लेकिन रेडियो एक ऐसी चीज है जो भारत के सभी जगहों पर आसानी से पहुँच सकती है।

अपने विशेष फीचर्स के कारण आने वाले समय में पॉडकास्ट आसानी से रेडियो को पीछे छोड़ सकता है।

टेलीविजन के घर-घर तक पहुंचने के पहले और आज भी गांवों में या रिमोट एरिया में मनोरंजन का साधन रेडियो ही है, कुछ साल पहले तक वाहनों में भी एफएम रेडियो देखने को मिलता था, बाद में धीरे-धीरे डिजिटल मीडिया सिस्टम ने इसकी जगह ले ली।

पॉडकास्ट के अन्य फायदे –

1. Freedom to Listen to Audio – पॉडकास्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपना काम करते हुए कुछ भी सुन सकते हैं क्योंकि ऑडियो बेस्ड होता है तो यहां पर कंटेंट भी उसी तरह तैयार किया जाता है, कि आवाज के रूप में सुनकर के लोग समझ सके।

2. Variety of Content – यहां पर लगभग सभी कैटगरी से जुड़े कंटेंट मौजूद है, जो कि समय के साथ बहुत ही तेजी के साथ बढ़ रहा है, इसके कई सारे बेहतरीन फायदे है।

3. यूट्यूब की बात करें तो यहां पर वीडियो के रूप में कंटेन्ट देखने को मिलता है, जबकि पॉडकास्टिंग में केवल ऑडिओ के रूप में चीजें सुनने को मिलती है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि आपको डिवाइस के पास हमेशा बैठे ही रहना पड़े।

4. विडिओ कंटेन्ट देखते समय हमें स्क्रीन पर देखते हुए ऑडिओ सुनना पड़ता है, क्योंकि विडिओ कंटेन्ट कुछ इस तरह से बनाए जाते है, कि उन्हें स्क्रीन पर देखते हुए ही समझ जा सकता है।

जबकि पॉडकास्ट के साथ ऐसा नहीं है, आप अपना कोई काम करते हु भी आसानी से पॉडकास्ट के एपिसोड सुन सकते है।

5. पॉडकास्ट में अपने हिसाब से कंटेन्ट को यूज करने की आजादी होती है आप जब चाहे अपने हिसाब से किसी भी तरह से कंटेन्ट को सुन सकते है।

इतना ही नहीं यदि आपको लगता है कि बाद मैँ इंटेनरेट की सुविधा नहीं मिलेगी तो इसके लिए आप एपिसोड को पहले से ही डाउनलोड करके रख सकते है।

आज यह रेडियो की जगह ले रहा है क्योंकि इसका एक कारण है कि, टेक्नलॉजी के आने पर यहां आने वाला कंटेंट, जिस तरह से टेलीविजन पर जो चीजें दिखाई देती है उसी को सुनना पड़ता है।

ठीक उसी तरह रेडियो पर भी जो कार्यक्रम आते हैं उसे ही सुनना पड़ता है, जबकि पॉडकास्ट में ऐसा नहीं है जब आप चाहे जो चाहे सुन सकते हैं, यूजर को अपने हिसाब से जो सुनने का मन करे उसे सुन सकते हैं।

6. पॉडकास्ट के लिए कोई रेडियो की तरह कोई अलग से डिवाइस ले जाने का झंझट नहीं है, इसे आप अपने स्मार्टफोन में ही सुन सकते है जो कि ज्यादा आसान है।

7. क्योंकि पॉडकास्ट सुनने के लिए जिस डिवाइस की जरूरत पड़ती है वह है स्मार्टफोन, और आज के समय में लगभग हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन है।

8. पॉडकास्ट सुनना एक नए जमाने का ट्रेंड है जो कभी आज से तीन-चार दशक पहले तक रेडियो का हुआ करता था, अब आज के समय में लोग रेडियो लेकर चलना पसंद नही करते इसलिए शहर और गांव में भी इसका चलन लगभग समाप्त हो रहा है, कुछ परिस्थितियों को छोड़कर।

9. Radio/FM Radio पर लाइव टेलीकास्ट होता है (हालांकि यह पूरे 24 घंटे नही होता है), खासकर एफएम रेडियो पर, यह जबकि पॉडकास्टिंग में ऑडियो बेस्ट कंटेंट एपिसोड के रूप में सुनने को मिलता है और हर एपिसोड की लंबाई क्रिएटर कंटेंट हिसाब से रख सकता है।

छोटे-छोटे एपिसोड के रूप में कंटेन्ट को सुनने में काफी आसानी होती है और इसे आसानी से समझा भी जा सकता है, जो कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है।

तो दोस्तों पॉडकास्ट क्या है? (Podcast Kya Hai, Podcast Meaning in Hindi) और इसके क्या फायदे है इसके बारे में हमें जानकारी मिल गयी होगी यदि आप इसके बारे में और ज्यादा जाना चाहते है तो नीचे कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गयी है।

रेडियो और पॉडकास्ट में अंतर –

हो सकता है कि आपको यह लग रहा हो कि पॉडकास्ट और रेडियो दोनों एक ही है तो आपका सोचना सही है लेकिन पूरी तरह से नहीं।

हा यह सही है कि ये दोनों एक ही है लेकिन इनमें सबसे बड़ा डिफरेंस इनकी टेक्नॉलजी का है और केवल यही एक कारण है जो ईन दोनों को एक बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है।

दोनों में कंटेन्ट को यूजर तक डिलीवर करने का एक ही तरीका है और वह है ऑडिओ फॉर्मेट, तो चलिए बात करते है इन दोनों के बीच अंतर के बारे में।

1. पॉडकास्ट को सुनने के लिए आपके पास इंटरनेट होना जरूरी है, जबकि रेडियो के माध्यम से इंटरनेट की कोई आवश्यकता नहीं है।

2. पॉडकास्ट को आप चाहे तो बाद में सुनने के लिए डाउनलोड भी कर सकते है, जबकि रेडियो के साथ ऐसा नहीं है।

3. पॉडकास्ट का एक सबसे बड़ा फायदा है कि आप इसमें अपने हिसाब से कंटेन्ट सुन सकते है जबकि रेडियो के साथ ऐसा नहीं है यहाँ पर आपको जो भी चीजें प्रसारित की जा रही है उसे ही सुनना पड़ता है।

ऊपर दिए गए कारणों से आप इसका मतलब आसानी से समझ सकते है (Podcast Meaning in Hindi) कि पॉडकास्ट आज के समय में क्यों इतना लोकप्रिय हो रहा है, पिछले कुछ सालों से टीवी के साथ भी रेडियो का ही किस्सा होता रहा है अपने हिसाब से कंटेन्ट प्रयोग करने के कारण आज यूट्यूब इतना पॉपुलर हो गया है।

पॉडकास्ट सुनने के कौन-कौन से एप्स है? –

पॉडकास्टिंग की जब शुरुआत हुई थी तब उसके बाद कुछ सालों तक इसमें ज्यादा ऑप्शन नहीं थे, लेकिन जब इंटरनेट ने आम लोगों तक अपनी अपनी पहुँच बनाई, इसके बाद हमें ऐसे बहुत से पोड़कटिंग प्लेटफोरम देखने को मिलते है।

नीचे कुछ ऐसे ही पॉडकास्ट सुनने के लिए एप्स की लिस्ट दी गयी है, जिनमें से आप किसी को भी प्रयोग कर सकते है।

Google Podcast –

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गूगल पॉडकास्ट काफी पॉपुलर एप है जहां पर आपको लगभग सभी तरह के पॉडकास्ट सुनने को मिल जाएंगे, आपके स्मार्टफोन में यह एप काफी कम जगह लेता है।

साथ ही इसको प्रयोग करना भी काफी आसान है, आप गूगल पॉडकास्ट को प्ले स्टोर/एप स्टोर से डाउनलोड कर सकते है, इसमें एक अच्छा फायदा है कि यहां एकाउंट बनाने के लिए केवल ईमेल आईडी से लॉगिन करने की जरूरत पड़ती है।

Khabri App –

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खबरी एप भी एक पॉपुलर प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा है, यहां पर भी आप न सिर्फ कंटेंट सुन सकते है, बल्कि एक क्रिएटर के रूप में भी काम करके पैसे कमा सकते है।

यहां पर हिंदी और अंग्रेजी भाषा का सपोर्ट मिलता है, साथ ही अन्य एप्स की तुलना में यहां काफी तेजी से क्लिक करते ही ऑडियो प्ले होना शुरू हो जाता है, यदि आप एक साधारण सा यूजर इंटरफेस चाहते है तो यह एप काफी बढ़िया है।

Anchor.FM –

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एंकर एफ़एम भी अन्य बाकी के प्लेटफार्म की तरह है जहां पर आप कोई भी पॉडकास्ट सुन सकते है, इसकी खास बात यह है कि यहां पर आप खुद पॉडकास्ट बना कर अपलोड भी कर सकते है।

और भविष्य में इससे पैसे कमाने की संभावनाएं आपके लिए खुल जाती है, इसके बारे में हमने आगे बात की है।

यहां पर अभी हिंदी भाषा मे वाइड रेंज में कंटेंट उपलब्ध नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे आने वाले समय में यहां पर भी और अधिक ऑडियो उपलब्ध होंगे।

KUKU FM –

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कूकू एफ़एम काफी बढ़िया एप है, ऑडिओ के रूप में कंटेन्ट के लिए, यहां पर हर कैटगरी में हजारों की संख्या में पॉडकास्ट उपलब्ध है जिसे अपनी इच्छानुसार जब चाहे सुन सकते है।

कूकू एफ़एम बाकि के अन्य प्लेटफॉर्म की तरह फ्री नहीं है, इसको प्रयोग करने के लिए आपको इसका सब्स्क्रिप्शन लेना पड़ता है जो कि Rs-400/Year है।

अगर इस हिसाब से भी देखा जाए तो यह बिल्कुल सही है, क्योंकि यहाँ पर एक छोटी सी फीस के बदले जो फीचर्स दिए जाते है वह पूरी तरह इसको जस्टफाइ करते है।

Self Help, Romantic, Motivation, Horror जैसी कई जॉनर में ऑडिओ कंटेन्ट सुनने को मिलेंगे, एड फ्री एक्सपीरीयंस के साथ एडी स्ट्रीमिंग और अनलिमिटेड डाउनलोड की सुविधा मिलती है, जो कि इसकी कीमत के हिसाब से बिल्कुल सही रखी गयी है।

Pocket Casts –

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इस एप्लिकेशन को लोकप्रिय बनाने वाली विशेषताएं क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म सिंकिंग और ऑटो एपिसोड डाउनलोडिंग और क्लीनअप जैसे खास फीचर्स हैं।

Pocket Casts ऊपर के बाकी प्लेटफॉर्म की तुलना में फ्री नहीं है यदि आप इसको प्रयोग करना चाहते है तो इसके लिए पेड सब्स्क्रिप्शन लेना पड़ता है।

Pocket Casts आपको अपनी सुनने की आदतों के आधार पर कई नए पॉडकास्ट खोजने की सहूलियत देता है।

अपने पसंदीदा विषयों के बारे में अधिक बातचीत खोजने में मदद करता है, इससे भी अधिक, यह आपके डाउनलोड किए गए पॉडकास्ट को व्यवस्थित करने के लिए एक सरल सेट-अप सेटअप दिया गया है।

इसके कुछ अतिरिक्त आकर्षक की बात करें तो टाइम स्किप, टाइम स्लीपर आदि शामिल हैं।

Apple Podcasts –

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apple ही पॉडकास्ट का जनक है, एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स के द्वारा साल 2005 में इसकी शुरुआत की गयी थी, तब से लेकर आज तक यह पॉपुलर प्रोडक्ट रहा है।

एप्पल पॉडकास्ट की बात करें तो यह एप्पल के सभी डिवाइसेस में ऑटो सिंक होकर चलता है, मतलब आप इसे iPhone, Mackbook या Apple Car Play, Apple TV कहीं पर भी सुन सकते है।

क्योंकि ये सभी डिवाइसेस एक इको सिस्टम में काम करती है, इसलिए एप्पल प्रोडक्टस के ऊपर यह आपको काफी बहतरीं experience दे सकता है।

यहाँ पर भी आपको लगभग वही सारे फीचर मिलते है, लेकिन यह केवल IOS के लिए उपलब्ध है, यदि आप एप्पल यूजर है तो इसको बड़ी ही आसानी से यूज कर सकते है।

ऊपर बताये गए ऐप्स के अलावा भी कई सारे प्लेटफ़ॉर्म है जहां पर ऑडियो कंटेंट सुन सकते है और इसे एक बार ट्राइ जरूर कर सकते है और ये गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।

पॉडकास्ट कितने प्रकार के होते है? –

Solo/Monologue Podcast –

इस तरह के पॉडकास्ट में केवल एक ही व्यक्ति पॉडकास्ट को होस्ट करता है, अगर आप खुद का कोई कंटेन्ट क्रिएट करते है तो उसे सोलो या मोनोलॉग पॉडकास्ट कहा जाता है।

क्योंकि इसके लिए केवल एक लोगों के जरूरत होती है इसलिए इस तरह के पॉडकास्ट को आसानी से बनाया जा सकता है।

Co-Host Podcast –

इस तरह के पॉडकास्ट में एक से ज्यादा लोग हो सकते है, co-hosted पॉडकास्ट में दो व्यक्ति एक ही टॉपिक पर चर्चा करते है।

इस तरह के पॉडकास्ट भी काफी ज्यादा चलते है, जिसमें लोग किसी टॉपिक पर बात करते है उसमें उनका अनुभव क्या है इसके बारे में जानकारी मिलती है।

Interview Podcast –

जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है, कि इस तरह के पॉडकास्ट में क्या कंटेन्ट हमें देखने को मिलता है।

इंटरव्यू पॉडकास्ट में होस्ट किसी मेहमान (Guest) का इंटरव्यू लिया जाता है, इस तरह के पॉडकास्ट में आपको अक्सर गेस्ट के द्वारा किसी टॉपिक से जुड़ी इनफार्मेशन मिलती है।

दूसरे शब्दों में कहें तो इंटरव्यू में गेस्ट अपने अनुभवों के बारे में जानकारियां शेयर करते है।

जैसे आप हेल्थ से जुड़े टॉपिक पर पॉडकास्ट बनाते है तो, कोई इंटरव्यू करने के लिए इससे जुड़े किसी एक्सपर्ट व्यक्ति (जैसे- डॉक्टर) को अपने पॉडकास्ट पर इन्वाइट करते है और उनसे उस विषय पर सवाल जवाब करते है।

Panel Discussion –

पैनल डिस्कशन को राउंड टेबल डिस्कशन भी कहते है, इस तरह के पॉडकास्ट में एक से ज्यादा होस्ट और गेस्ट हो सकते है।

पैनल डिस्कशन में दो से ज्यादा लोग होते है, अक्सर इस तरह के पॉडकास्ट में किसी टीम या किसी फील्ड से जुड़े कुछ लोगों या अलग-अलग फील्ड से जुड़े लोगों को बुलाया जाता है।

Fictional and Non-Fictional Content –

फिक्शनल का मतलब है भूतकाल में हुई घटनाएं, जब किसी सच्ची घटना पर आधारित कोई कहानी होती है तो उसे फिक्शनल स्टोरी कहते है।

फिक्शनल स्टोरी के ऊपर बने पॉडकास्ट काफी ज्यादा चलते है, विडिओ के रूप में फिल्मों, टीवी और यूट्यूब के माध्यम से तो आपने ऐसी घटनाओं को देखा होगा।

पॉडकास्ट के रूप में भी इस तरह के कंटेन्ट को आसानी से बनाया जा सकता है, जो लोगों को कोई भी काम करते समय सुनने की आजादी दे।

फिक्शनल के रूप में Documentry, News Reading इत्यादि चीजें आती है।

नॉन-फिक्शनल का मतलब है ऐसी चीजों से जिसका कोई अस्तित्व नहीं है ऐसी कोई कहानी जो कल्पनाओ पर आधारित हो।

पहले भी रेडियो पर ऐसी कहानियाँ सुनने को मिलती थी जिसे लोग बड़े ही शौक से सुना करते थे, कहानियाँ, ड्रामा, कल्पनाओं, कविता, हास्य व्यंग्य जैसी चीजें नॉन-फिक्शनल के रूप में देखने को मिलती है।

इस तरह के पॉडकास्ट को Storytelling या Narration भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें किसी भी चीज को एक स्टोरी के माध्यम से उसे रोचक बनाते हुए श्रोताओ तक पहुंचाया जाता है।

Re-Purposed Content –

ऐसा कोई कंटेन्ट जिसे अलग-अलग फॉर्मैट के लिए बनाया गया हो जैसे ब्लॉग, विडिओ इत्यादि, आज के समय में आप यूट्यूब पर बहुत से ऐसे विडिओ देख सकते है।

जो यूट्यूब पर तो विडिओ के रूप में है लेकिन उसे बाद में ऑडिओ के रूप में भी बनाया जाता है ताकि लोग उसको आसानी से सुन सकें।

क्योंकि इंटरव्यू जैसे कंटेन्ट को विडिओ के रूप में देखने की जरूरत नहीं पड़ती है, इसे ऑडिओ के रूप में भी सुना जा सकता है।

पॉडकास्टिंग कैसे शुरू करें? –

पॉडकास्टिंग (Podcast Kya Hai?) करियर के एक नए प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है रेडियो पर रेडियो जॉकी (RJ) के रूप में जॉब पाने के लिए उससे संबंधित कोर्स करना जरूरी होता है और फिर इसके बाद जॉब ढूंढनी पड़ती है।

पॉडकास्टिंग के साथ ऐसा नहीं है, यहां पर आपके पास बात करने की वह स्किल होनी चाहिए जिससे लोगों को जो कुछ भी कहना चाहते हैं वह बात समझा पाने में सक्षम हो, जैसे कुछ सिखाना, मनोरंजन करना, स्टोरी सुनाना, बातचीत में माहिर होना इत्यादि।

हालांकि इस तरह की स्किल की जरूरत रेडियो में भी होती हैं, लेकिन वहां पर आप घर पर रहकर पढ़ाई करते हुए पार्ट टाइम में वह काम नहीं कर सकते हैं साथ ही इन सब फायदे और नुकसान के बीच इन दोनों की अलग-अलग ऑडियंस और काम करने का तरीका भी अलग होता है

कुल मिलाकर बात करें तो पॉडकास्टिंग, छोटे से गांव के स्टूडेंट या शहर में रहने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स या जॉब कर रहे हो या अपना शौक पूरा करना हो, सभी के लिए है जो अपनी आवाज लोंगों तक पहुंचाना चाहते है।

पॉडकास्ट शुरू करने के दो तरीके है जिसमें पहलाहै बिल्कुल फ्री तरीका और दूसरा है इनवेस्टमेंट करके।

अपने जरूरत और सुविधा के अनुसार कोई सा भी तरीका चुन सकते है आगे हम इन दोनों तरीकों के बारे में विस्तार से बात करेंगे।

पॉडकास्टिंग के लिए कौन सा प्लेटफॉर्म सही है? –

पॉडकास्टिंग एक डिस्ट्रब्यूशन सिस्टम पर काम करता है, जिसका मतलब है कि आप किसी एक प्लेटफॉर्म पर अपना कंटेन्ट बनाते है तो उसे बाकी के सभी जगहों पर भी दिखा सकते है।

इसके लिए आपको बार-बार अपना कंटेन्ट हर जगह अपलोड करने की जरूरत नहीं है, जो भी पॉडकास्ट आप अपलोड करते है उसकी एक RSS लिंक बनती है, बस इसी लिंक की मदद से हर जगह अपना पॉडकास्ट पहुँच सकते है।

बस एक बार आपको इस RSS लिंक की मदद से सारा सेटअप करना होता है, उसके बाद जब भी आप कोई पॉडकास्ट कहीं पर अपलोड करते है तो ऑटोमेटिक रूप से सभी जगहों पर आपका पॉडकास्ट पहुँच जाता है जहँ पर आपने सेटअप कर रखा होगा।

उदाढ़न के तौर पर बात करें यदि आपने Anchor.FM पर अपना पॉडकास्ट अपलोड किया है तो उसे Google Podcast, Spotify, Khabri इत्यादि सभी जगहों पर देख सकते है।

इसलिए आप अपने अनुसार कोई भी प्लेटफॉर्म चुन सकते है और वहाँ से सभी जगहों पर अपने पॉडकास्ट को डिस्ट्रिब्यूट कर सकते है।

Free Method –

बिना पैसों के पॉडकास्ट स्टार्ट करने के लिए ये सबसे अच्छे प्लेटफॉर्म है, Hubhopper, Khabri, Anchor.FM,

ये दो प्लेटफॉर्म न सिर्फ आपको खुद का पॉडकास्ट बिल्कुल फ्री में होस्ट करने की सुविधा देते है, बल्कि अन्य प्लेटफॉर्म को डिस्ट्रिब्यूट करने का भी काम करते है।

जिसका मतलब यह होता है कि आपको अपना कंटेन्ट केवल एक जगह अपलोड करना होता है उसके बाद सभी जगहों पर (KUKU FM, Google Podcast, Pocket FM इत्यादि) ये ऑटोमेटिक रूप से उपलब्ध करा देते है।

नीचे इस विडिओ में Hubhopper पर अकाउंट बनाने और उससे जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियाँ दी गयी है, जिनकी मदद से आप Hubhopper पर पॉडकास्टिंग की शुरुआत कर सकते है।

Hubhopper बिल्कुल फ्री में पॉडकास्ट को अपलोड करने की सुविधा देता है, यह एक इंडियन प्लेटफॉर्म है, इसके अलावा आप चाहें तो Anchor. FM पर भी शुरुआत कर सकते है।

नीचे इस यूट्यूब विडिओ में Hubhopper के बारे में जानकारी दी गयी है –

यूट्यूब Vs पॉडकास्ट –

अगर आप यूट्यूब विडिओ बनाने के लिए सेटअप करते है तो उसके कई सारी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है, जैसे लाइट, कैमरा, माइक, एक अच्छा सा बैकग्राउंड इत्यादि।

जबकि पॉडकास्टिंग के लिए केवल एक माइक की जरूरत पड़ती है, बाकि एडिटिंग या पब्लिश करने का सारा काम आप अपने स्मार्टफोन से भी कर सकते है।

कोई भी पॉडकास्ट रिकार्ड करना हो तो इसके लिए सिर्फ ऑडिओ का ध्यान रखना पड़ता है, जो कि कहीं भी किसी भी शांत जगह पर या कमरे में रिकार्ड किया जा सकता है।

यदि आपके पास कोई भी सेटअप नहीं है तो स्मार्टफोन के माइक से भी ऑडिओ रिकार्ड कर सकते है, आज के समय में स्मार्टफोन के माइक भी बहुत अच्छी क्वालिटी के वॉयस रिकार्ड कर लेते है।

यहां यूट्यूब से तुलना करने का हमारा मकसद किसी भी माध्यम को कम या ज्यादा बताना नहीं है, बल्कि शुरुआत में उसमें लगने वाले रिसोर्सेज से है।

आवाज को कैसे रिकॉर्ड करें?

किसी भी कंटेन्ट को बनाते समय उसे स्क्रिप्ट जरूर करें या उसे पहले ही लिख लें, इससे रिकॉर्डिंग के समय आप अपने टॉपिक से नहीं भटेकेंगे।

यदि आपको बोलने की प्रैक्टिस है तो फिर इसकी कोई जरूरत नहीं है, लेकिन एक नए पॉडकास्टर को यह जरूर करना चाहिए।

इसके पीछे का कारण यह है, कि यदि आप जरूरत से ज्यादा समय लेते है तो यूजर जल्दी बोर होने लगते है और इस बात के ज्यादा चांस है कि वो आपका पॉडकास्ट बंद कर दें।

हर किसी का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए आप इस बात का ध्यान रखें कि कम समय में ज्यादा से ज्यादा सीखा सकें, न कि ज्यादा समय में कम।

समय का ध्यान रखना केवल पॉडकास्टिंग ही नहीं, यूट्यूब, ब्लॉगिंग जैसी सभी जगहों पर ध्यान रखना पड़ता है।

शॉर्ट विडिओ आज के समय में इसी लिए तेजी से वायरल होती है कि उन्हें देखने के लिए ज्यादा टाइम नहीं देना पड़ता है और आप 60 सेकंड में भी चाहे तो कुछ बहुत अच्छा सीखा सकते है।

रिकॉर्डिंग के समय किन बातों का ध्यान रखें? –

1. आवाज की अच्छे ढंग से रिकॉर्ड करें, चाहे विडिओ कंटेन्ट हो या ऑडिओ कंटेन्ट सभी में वॉयस का सही से रिकार्ड करना जरूरी है, यदि बैकग्राउंड में कोई आवाज आ रही है और यह आपकी मजबूरी है तो शुरुआत में ही इसे बता दिया करें।

जैसे घर में चल रहे मेंटेनेंस की आवाज, या पास में कंट्रक्शन की आवाज ऐसे शोर अस्थाई होते है जो कुछ दिन में खत्म हो जाते है, आप पॉडकास्ट शुरू होने से पहले इसके बारे में बता देते है तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन यह ज्यादा दिनों तक न हो।

2. एडिट करने के बाद ज्यादा तेज bg म्यूजिक न लगाएं, आप अपने पॉडकास्ट में बैकग्राउंड म्यूजिक जरूर लगाएं क्योंकि यह उसको एक अच्छी फ़ील देता है, लेकिन बहुत ज्यादा तेज म्यूजिक न लगाएं, जिससे कि यूजर कंटेन्ट समझने में परेशानी हो।

पॉडकास्टिंग टूल्स –

वैसे तो पॉडकास्टिंग को शुरू करने के लिए खास टूल्स की जरूरत नहीं पड़ने वाली, आज के समय में स्मार्टफोन इतने फीचर्स के साथ आते है कि सर काम केवल इस एक डिवाइस से हो जाता है।

लेकिन यदि आप इनवेस्टमेंट करना चाहते है तो जरूर करें क्योंकि टूल्स की मदद से क्वालिटी को काफी ज्यादा इम्प्रूव किया जा सकता है।

नीचे ये कुछ टूल्स है जो पॉडकास्टिंग शुरू करने के लिए जरूरी है –

माइक्रोफोन –

वैसे तो ऑडिओ रिकार्ड करने के लिए आप बजट के अनुसार किसी भी माइक का प्रयोग कर सकते है, लेकिन अच्छी वॉयस रिकार्ड करने के लिए एक अच्छे माइक्रोफोन का होना जरूरी है।

अगर केवल पॉडकास्टिंग के लिए माइक की बात करें तो नीचे ये कुछ माइक है जिन्हें आप खरीद सकते है।

स्मार्टफोन –

आज के समय में स्मार्टफोन तो हर किसी के पास है, आप किसी भी स्मार्टफोन से पॉडकास्टिंग शुरू कर सकते है।

स्मार्टफोन की जरूरत पॉडकास्ट को एडिट करने थंबनेल बनाने और उसे अपलोड करने के लिए पड़ती है, यदि आपके पास कंप्युटर/लैपटॉप है तो इसकी मदद से ये सारे काम बड़ी ही आसानी से किये जा सकते है।

Microphone Stand –

अगर आप एक अच्छे माइक में इन्वेस्ट कर रहे है तो उसके साथ एक अच्छा स स्टैन्ड भी जरूर लें ताकि बिना किसी नॉइस के आप ऑडिओ रिकार्ड कर सकें।

कई बार होता है कि बोलते समय माइक के थोड़ा सा भी हिल जाने से उसकी आवाज रिकार्ड हो जाती है, यहाँ पर माइक स्टैंड काम आता है।

इसकी मदद से माइक को किसी भी स्थिति में सेट किया जा सकता है, जिससे आपको बोलते समय परेशानी नहीं होगी।

पॉडकास्ट से पैसे कैसे कमाएं? –

भले ही कोई काम आप कितना भी पैशन के साथ क्यों न शुरू करें लेकिन यदि आप उससे कुछ भी इनकम नहीं कर रहे है तो एक समय के बाद हमारी वह आदत छूट जाती है।

उसी तरह यदि पॉडकास्ट आपका पैशन है यदि आपको आवाज से प्यार है तो जरूर इसे अपने शौक के तौर पर शुरू कर सकते है।

अगर बात करें पैसों की तो कई सारे तरीके है जिनसे आप पॉडकास्टिंग करके पैसे कमा सकते है, नीचे हमने कुछ मुख्य तरीकों के बारे में बात की है।

Sell Your Products or Affiliate Marketing –

बात चाहे एफिलीएट मार्केटिंग की हो या खुद का प्रोडक्ट सेल करने की हो, पॉडकास्टिंग के माध्यम से आसानी से ये किया जा सकता है।

जैसा कि यूट्यूब पर आप विडिओ के डिस्क्रिप्शन में अपनी एफिलीएट लिंक लगाते है, उसके बाद कोई भी यूजर विडिओ देखने के बाद उस लिंक से जाकर कोई भी समान खरीद सकता है।

उसी तरह पॉडकास्टिंग में भी आप अपने पॉडकास्ट के डिस्क्रिप्शन में प्रोडक्ट की लिंक दे सकते है।

आज के समय में एफिलीएट मार्केटिंग पैसे कमाने का एक बड़ा जरिया है और इससे भी ज्यादा पैसे कमाए जा सकते है खुद के प्रोडक्ट लांच करके।

आप अपने कंटेन्ट की कैटगरी के हिसाब से किसी भी प्रोडक्ट को चुन कर उसे प्रोमोट करके एक अच्छी-खासी इनकम जेनरेट कर सकते है।

Advertisement –

जैसा कि हम अन्य माध्यमों में देखते है कि विडिओ देखते समय बीच में हमें हजारों तरह के एड देखने को मिलते है।

उसी तरह पॉडकास्टिंग में भी एड के माध्यम से पैसे कमाए जा सकते है, हालांकि इसमें ऐसे एड सुनने को मिलते है जो, ऑडिओ के हिसाब से बनाये गए होते है।

विडिओ की तरह पॉडकास्ट के शुरुआत और बीच में भी एड के माध्यम से अपने पॉडकास्ट को आसानी से मोनिटाइज कर सकते है।

Sponsorship –

यदि आपका पॉडकास्ट अधिक लोग सुनते है तो आपके लिए स्पॉन्सरशिप से पैसे कमाने के मौके मिलते है।

जैसा कि यूट्यूब, ब्लॉग पर हमें देखने को मिलता है, ठीक उसी तरह यहाँ भी किसी भी प्रोडक्ट को स्पॉन्सर कर सकते है और बदले में पैसे चार्ज कर सकते है।

स्पॉन्सरशिप की अगर बात करें तो इससे पैसे कमाने के लिए आपके पॉडकास्ट को सुनने वाले यूजर्स की संख्या अच्छी खासी होनी चाहिए।

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